भोपाल 1 फरवरी (आरएनएस)। केंद्रीय बजट 2026-27 के विरोध में रविवार को मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के भोपाल स्थित कार्यालय के सामने प्रदेश कांग्रेस महामंत्री अमित शर्मा के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने हाथों में झुनझुना लेकर भाजपा सरकार के बजट को झुनझुना बजट करार दिया।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस महामंत्री अमित शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार ने महंगाई से त्रस्त आम जनता, बेरोजगार युवाओं, किसानों, महिलाओं और मध्यम वर्ग सभी को सिर्फ वादों का झुनझुना पकड़ा दिया है। न महंगाई में कोई वास्तविक राहत दी गई, न मध्यम वर्ग को टैक्स में राहत मिली, न महिलाओं की सुरक्षा और रोजगार के लिए ठोस प्रावधान किए गए। उन्होंने कहा कि यह बजट मध्य प्रदेश के साथ भी सौतेला व्यवहार करता है।
कृषि प्रधान राज्य होने के बावजूद मध्य प्रदेश के किसानों, युवाओं और गरीब वर्ग के लिए कोई विशेष पैकेज या ठोस सहायता की घोषणा नहीं की गई। स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे बुनियादी क्षेत्रों में भी प्रदेश को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला।
अमित शर्मा ने कहा कि यूपीए सरकार के समय किसानों, युवाओं, शिक्षा और स्वास्थ्य को बजट में प्राथमिकता दी जाती थी, जबकि एनडीए सरकार के बजटों में केवल आंकड़ों का खेल है और आम जनता की समस्याओं की उपेक्षा की जा रही है।
किसान-विरोधी, युवा-विरोधी, महिला-विरोधी और मध्यम वर्ग-विरोधी बजट है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता राहुल राज ने कहा कि यह बजट स्पष्ट रूप से किसान और युवा विरोधी है। भाजपा सरकार एक ओर किसानों की आय दोगुनी करने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, थ्रेशर, सिंचाई उपकरण और अन्य कृषि इक्विपमेंट पर जीएसटी लगाकर खेती की लागत बढ़ा रही है। बजट 2026-27 में इन उपकरणों पर जीएसटी हटाने या कम करने का कोई प्रावधान नहीं किया गया, जिससे अन्नदाता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला गया है।
राहुल राज ने कहा कि खेती की लागत- डीजल, खाद, बीज और कीटनाशकों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन इसके बावजूद बजट में किसानों को कानूनी एमएसपी की कोई गारंटी नहीं दी गई। यह बजट किसान को आत्मनिर्भर बनाने के बजाय कजऱ् में धकेलने वाला बजट है। उन्होंने कहा कि इकोनॉमिक सर्वे खुद स्वीकार करता है कि देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती रोजगार है, लेकिन इसके बावजूद बजट में युवाओं के लिए कोई ठोस रोजगार योजना, न शहरी रोजगार गारंटी और न ही नई भर्तियों का स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत किया गया। यह बजट जॉबलेस ग्रोथ को और गहरा करता है।

