नई दिल्ली ,02 फरवरी । वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट 2026 पेश करते हुए टेक्नोलॉजी और डिजिटल सेक्टर को देश के विकास का इंजन बताया है। सरकार ने भारत को ग्लोबल डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (्रढ्ढ) हब बनाने के लिए एक बड़ा दांव खेला है। इसके तहत विदेशी क्लाउड कंपनियों को साल 2047 तक टैक्स में भारी छूट देने का ऐलान किया गया है। सरकार का मकसद दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों को भारत में अपना आधार बनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
भारत में डेटा सेंटर बनाने पर ही मिलेगा फायदा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस टैक्स छूट का लाभ उठाने के लिए विदेशी कंपनियों को भारत में स्थापित डेटा सेंटर्स का ही उपयोग करना होगा। ये कंपनियां यहाँ से पूरी दुनिया के ग्राहकों को अपनी क्लाउड सेवाएं दे सकती हैं। इसके अलावा, अगर कोई विदेशी कंपनी भारतीय ग्राहकों को किसी भारतीय रीसेलर (क्रद्गह्यद्गद्यद्यद्गह्म्) के जरिए सर्विस देती है, तो उसे भी इस टैक्स छूट के दायरे में रखा गया है। सरकार का मानना है कि इस फैसले से भारत में विदेशी निवेश तेजी से बढ़ेगा और बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर स्थापित होंगे। इससे न केवल एआई सेवाएं तेज होंगी, बल्कि युवाओं के लिए टेक सेक्टर में नौकरियों के नए अवसर भी पैदा होंगे।
इंटरनेट की स्पीड बढ़ेगी, लेकिन सस्ता होने में लगेगा वक्त
इस घोषणा का आम यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा, इसे समझना भी जरूरी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह एक नीतिगत फैसला है जिसका असर धीरे-धीरे दिखाई देगा। अगर कंपनियां भारत के डेटा सेंटर का इस्तेमाल करती हैं, तो डेटा को प्रोसेस होने में कम समय लगेगा, जिससे ऐप्स और वेबसाइट्स की स्पीड बढ़ सकती है। इसका सबसे ज्यादा फायदा वीडियो स्ट्रीमिंग और ऑनलाइन गेमिंग के शौकीनों को मिलेगा। हालांकि, सर्विस सस्ती होने की कोई तत्काल गारंटी नहीं है। कंपनियों का ऑपरेशन खर्च कम जरूर होगा, लेकिन इसका फायदा ग्राहकों को मिलने में समय लग सकता है।
एआई और 5जी से बदलेगी सरकारी सेवाओं की तस्वीर
बजट में एआई के विस्तार पर खास जोर दिया गया है। भारत में डेटा स्टोरेज और कंप्यूटिंग क्षमता बढऩे से एआई टूल्स को विकसित करना आसान होगा। सरकार चाहती है कि एआई का इस्तेमाल सिर्फ कॉर्पोरेट जगत तक सीमित न रहे, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और खेती जैसे क्षेत्रों में भी इसका उपयोग बढ़े और सरकारी सेवाएं बेहतर हों। डेटा के देश के भीतर ही स्टोर होने से नियमों का पालन आसान होगा और सरकारी निगरानी बेहतर हो सकेगी। इसके साथ ही, सरकार ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बड़ा बजट आवंटित किया है, जिससे इंटरनेट कनेक्शन और 5जी नेटवर्क को और मजबूती मिलेगी।
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