इस्लामाबाद ,04 फरवरी । भारत द्वारा यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ की गई अहम व्यापारिक डील से पड़ोसी देश पाकिस्तान को बड़ा आर्थिक झटका लगने की आशंका जताई जा रही है। खास तौर पर इन समझौतों का सीधा असर पाकिस्तान के कपास और वस्त्र निर्यात पर पड़ सकता है। पाकिस्तान के उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो वैश्विक बाजार में उसकी प्रतिस्पर्धी स्थिति कमजोर हो सकती है।
भारत ने जहां यूरोपीय संघ के साथ बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर सहमति जताई है, वहीं अमेरिका के साथ नई ट्रेड डील के तहत भारत पर लगाए गए आयात शुल्क में भी बड़ी कटौती की गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर लागू 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने का ऐलान किया है।
पाकिस्तान के उद्योग जगत में बढ़ी चिंता
ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, कॉटन जिनर्स फोरम के अध्यक्ष एहसानुल हक ने मौजूदा हालात को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि सरकार ने कपास और कपड़ा उद्योग को राहत देने के लिए तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए, तो पाकिस्तान के निर्यात में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है। उन्होंने चेताया कि नीतिगत फैसलों में देरी से क्षेत्रीय स्तर पर लागत का अंतर और बढ़ेगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाकिस्तान की पकड़ कमजोर होती जाएगी।
भारत को क्यों मिल रही है बढ़त
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, हालात तब और चुनौतीपूर्ण हो गए जब यूरोपीय संघ ने भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क शून्य कर दिया। इसके साथ ही अमेरिका ने भारत पर टैरिफ घटाकर 18 से 25 प्रतिशत के दायरे में कर दिया है। इसके विपरीत, पाकिस्तान के उत्पादों को अमेरिकी बाजार में अब भी करीब 19 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है। जानकारों का कहना है कि इस शुल्क अंतर का सीधा लाभ भारत को मिलेगा।
सरकार से राहत पैकेज की मांग
कॉटन जिनर्स फोरम ने पाकिस्तान सरकार से मांग की है कि देश में उत्पादन लागत को पड़ोसी देशों के बराबर लाया जाए, ताकि निर्यात के मोर्चे पर प्रतिस्पर्धा बनी रहे। इसके अलावा लंबे समय से लंबित रिफंड जारी करने या उन्हें सुपर टैक्स देनदारियों के साथ समायोजित करने की भी मांग की गई है।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील से नई राह
सोमवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के बाद भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की। भारत और अमेरिका के बीच यह व्यापार समझौता करीब एक साल से चर्चा में था। अमेरिका की ओर से इस डील में यह शर्त भी रखी गई है कि भारत रूस से तेल आयात को बंद करेगा।
ईयू के साथ ‘मदर ऑफ ऑल डील्सÓ
भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते को व्यापक रूप से ‘मदर ऑफ ऑल डील्सÓ कहा जा रहा है। दोनों पक्षों ने संकेत दिए हैं कि इस समझौते को इसी वर्ष लागू किया जा सकता है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, समझौते के लागू होते ही भारत के करीब 99 प्रतिशत निर्यात को यूरोपीय संघ में शुल्क मुक्त पहुंच मिलेगी। इससे आने वाले पांच वर्षों में भारत के निर्यात के दोगुना होने की संभावना जताई जा रही है।
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