इस्लामाबाद ,04 फरवरी । बलूचिस्तान में सुरक्षा स्थिति को लेकर पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने नेशनल असेंबली में स्वीकार किया है कि पाकिस्तानी सेना बलूचिस्तान में सक्रिय बलोच लिब्रेशन आर्मी (बीएलए) का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने में सफल नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार और सेना दोनों ही प्रांत में विद्रोहियों की गतिविधियों को रोकने में विफल रही हैं।
ख्वाजा आसिफ ने अपने बयान में कहा कि बीएलए के पास अत्याधुनिक हथियार हैं, जो कई मामलों में पाकिस्तानी सेना के पास उपलब्ध संसाधनों से भी बेहतर हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि बीते कुछ दिनों में हुई हिंसक झड़पों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। बीएलए की ओर से दावा किया गया है कि तीन दिनों के संघर्ष में 200 से अधिक पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि बलूचिस्तान पाकिस्तान के कुल भू-भाग का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है और इतने बड़े क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना बेहद चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सेना के जवानों पर अत्यधिक दबाव है और विशाल इलाके में गश्त तथा निगरानी करना कठिन हो गया है।
ख्वाजा आसिफ ने बताया कि बलूच विद्रोहियों के पास आधुनिक राइफलें, नाइट विजन उपकरण, हीट-डिटेक्टिंग लेजर और पूरा कॉम्बैट गियर मौजूद है। उन्होंने कहा कि इनमें से कई उपकरण ऐसे हैं, जो पाकिस्तानी सेना के पास सीमित संख्या में ही उपलब्ध हैं। मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि विद्रोही पंजाबी मजदूरों, आम नागरिकों और कम आय वर्ग के लोगों को निशाना बना रहे हैं।
हालांकि, ख्वाजा आसिफ ने बीएलए को आतंकवादी संगठन बताते हुए उनसे किसी भी तरह की बातचीत की संभावना से इनकार किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाने वालों से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
यह बयान ऐसे समय में आया है, जब बीएलए के लड़ाकों द्वारा बलूचिस्तान के 15 से अधिक शहरों में प्रभाव बढ़ाने और कई इलाकों पर नियंत्रण का दावा किया जा रहा है। पाकिस्तान सरकार की यह स्वीकारोक्ति देश की आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों को उजागर करती है, जहां बलूचिस्तान में अलगाववादी गतिविधियां लगातार तेज होती जा रही हैं।
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