नई दिल्ली ,05 फरवरी । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (्रढ्ढ) की दुनिया में एक नए धमाके ने शेयर बाजार की नींव हिला दी है। ष्टद्यड्डह्वस्रद्ग चैटबॉट बनाने वाली कंपनी ्रठ्ठह्लद्धह्म्शश्चद्बष् ने हाल ही में कुछ ऐसे ्रढ्ढ प्लगइन्स लॉन्च किए हैं, जिनकी वजह से ग्लोबल मार्केट से देखते ही देखते 285 अरब डॉलर (करीब 26,129 अरब रुपये) साफ हो गए। इस नए ‘एजेंटिक एआईÓ का सबसे गहरा असर सॉफ्टवेयर, लीगल टेक और फाइनेंशियल सर्विसेज से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर पड़ा है, जहां भारी गिरावट दर्ज की गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने 30 जनवरी को 11 नए ओपन सोर्स प्लगइन्स पेश किए हैं, जो विशेष रूप से ‘ष्टद्यड्डह्वस्रद्ग ष्टश2शह्म्द्मÓ टूल्स के साथ काम करने के लिए डिजाइन किए गए हैं। इनमें से एक विशेष टूल लीगल वर्कफ्लो यानी कानूनी कामकाज को ऑटोमेट करने के लिए बनाया गया है और यही मार्केट में मचे हाहाकार की मुख्य वजह बना हुआ है। दरअसल, एंथ्रोपिक का क्लॉड कोवर्क (ष्टद्यड्डह्वस्रद्ग ष्टश2शह्म्द्म) एक ‘एजेंटिक एआई असिस्टेंटÓ है, जिसे जनवरी की शुरुआत में ही बाजार में उतारा गया था।
जहां अब तक एआई टूल्स का इस्तेमाल मुख्य रूप से कोडिंग के लिए होता था, वहीं एंथ्रोपिक के ये नए टूल्स नॉन-कोडिंग कार्यों को भी बड़ी आसानी से निपटा सकते हैं। ये प्लगइन्स फाइलें पढऩे, फोल्डर्स को व्यवस्थित करने, डॉक्यूमेंट्स ड्राफ्ट करने और मल्टी-स्टेप टास्क को पूरा करने में सक्षम हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि कंपनियां इन्हें अपनी जरूरत के हिसाब से कस्टमाइज कर सकती हैं। यानी किसी काम को कैसे करना है और किन चीजों को ऑटोमेट करना है, यह सब अब बेहद आसान हो गया है। इसका सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ रहा है, जो अब तक इन सेवाओं को बेचती थीं।
बाजार में मची इस खलबली की असली वजह एंथ्रोपिक की बदलती रणनीति है। विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी ने केवल टूल्स का सेट लॉन्च नहीं किया है, बल्कि काम करने का एक नया तरीका ईजाद कर लिया है। एंथ्रोपिक अब सिर्फ एआई मॉडल्स या एपीआई (्रक्कढ्ढ) बेचने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वह सीधे वर्कफ्लो पर अधिकार जमा रही है। आसान भाषा में समझें तो अगर कंपनी सिर्फ एपीआई देती तो थॉमसन रॉयटर्स जैसी कंपनियां अपनी सर्विस उस पर बना लेतीं, लेकिन एंथ्रोपिक ने ‘रेडीमेड सॉल्यूशनÓ बेचना शुरू कर दिया है। इसका मतलब है कि अब वह सर्विस प्रोवाइडर नहीं, बल्कि सीधे तौर पर इन दिग्गज कंपनियों की प्रतियोगी (ष्टशद्वश्चद्गह्लद्बह्लशह्म्) बन गई है, जिससे निवेशकों में डर का माहौल है।
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