देहरादून,07 फरवरी (आरएनएस)। हाल में ओमान में हुई अल्ट्रा रन के विश्व विजेता एथलीट नायक कलम सिंह(सेनि.)ने शनिवार को उत्तरांचल प्रेस क्लब के तत्वावधान में प्रेस से मिलिए कार्यक्रम में प्रतिभाग किया और दौड़ को लेकर अपने अनुभव साझा किए। कलम ने बताया कि बचपन में पहाड़ी रास्तों पर दौडऩे और फौज में कठिन परिश्रम और अनुशासित होने का ही उन्हें अल्ट्रा टेल रन में भरपूर फायदा मिला है। आपको बता दें कि 11 से 13 दिसंबर तक आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में 68 देशों के 4500 प्रतिभागी शामिल हुए थे, जिनमें कलम सिंह बिष्ट पहले स्थान पर रहे। बतौर कलम सिंह उन्होंने 120 किमी की यह अल्ट्रा टेल रन 18 घंटे 18 मिनट में यह रेस पूरी की। यह उनका पहला अंतरराष्ट्रीय इवेंट था, जिसमें उन्होंने गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने इसका श्रेय अपने पिता स्व. जय सिंह बिष्ट और माता कमला देवी को दिया। कमल ने बताया कि गरीबी और संसाधनों के अभाव के बीच मेहनत कर वह फौज में भर्ती हुए। जिसके बाद वह नायक पद से सेवानिवृत्त हुए। इस बीच लगातार मैराथन समेत अन्य प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करते रहे। उन्होंने कई जगह मेडल जीते हैं, लेकिन नौकरी समय वह इस पर ज्यादा फोकस नहीं कर पाए। उन्होंने बताया कि दौड़ में सबसे कठिन अल्ट्रा टेल होती है, जो पहाड़ी रास्तों यानी कि ऊबड़ खाबड़ रास्तों पर होती है। यह 42 किमी से अधिक और पहाड़ी रूट पर होती है। नायक कलम सिंह बिष्ट ने बताया कि वह मूल रूप से उत्तराखंड में चमोली जिले के देवाल स्थित मुंदोली के रहने वाले हैं। उत्तराखंड में युवाओं को कर रहे तैयार कलम सिंह ने बताया कि, करीब तीन साल पहले उन्होंने मुंदोली रेडिस क्लब का गठन किया। जिसके माध्यम से वह उत्तराखंड के युवाओं को एथलेटिक्स के लिए तैयार करते हैं। इसके लिए वह गांव-गांव जाकर एक सप्ताह का शिविर लगाकर बच्चों का चयन करते हैं। इस समय करीब 370 युवा उनसे जुड़े हैं। इनमें 20 से 25 खिलाड़ी आने वाले समय में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में मेडल जीतने को तैयार हैं, जबकि 2 से 3 खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार हैं। इसके पीछे उनका मकसद युवकों को नशे और मोबाइल की लत से दूर रखना भी है। इस दौरान कई पत्रकारों ने नायक कलम सिंह बिष्ट से सवाल भी किए, जिनका बिष्ट ने बड़ी सरलता से उत्तर देकर उनकी जिज्ञासा को शांत किया। इस मौके पर प्रेस क्लब अध्यक्ष अजय राणा, महामंत्री योगेश सेमवाल आदि शामिल रहे।
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