रुड़की,10 फरवरी (आरएनएस)। केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) रुड़की ने मंगलवार को अपनी स्थापना के 80 वर्ष पूरे होने पर समारोह का आयोजन किया। संस्थान के रवींद्रनाथ टैगोर सभागार में आयोजित कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और छात्रों ने संस्थान की आठ दशकों की यात्रा और राष्ट्र निर्माण में उसके योगदान को साझा किया। समारोह में संस्थान के निदेशक प्रो. आर प्रदीप कुमार और अन्य अतिथियों ने सीबीआरआई के प्रतीक चिह्न का अनावरण किया। यह नया मोनोग्राम संस्थान की आधुनिक पहचान और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण को दर्शाता है। इस अवसर पर खानग्पा: द लिविंग हाउस ऑफ लद्दाख शीर्षक पुस्तक सहित वर्ष 2024 व 2025 के शोध प्रकाशनों का विमोचन किया गया। उत्कृष्ट कार्य करने वाले वैज्ञानिकों को सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र पुरस्कार और खेलकूद प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि पूर्व निदेशक डॉ. एन. गोपालकृष्णन ने सीबीआरआई द्वारा आपदा न्यूनीकरण और उच्च हिमालयी क्षेत्रों के लिए विकसित उन्नत मॉडलिंग तकनीकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्थान की भू-तकनीकी और संरचनात्मक इंजीनियरिंग में विशेषज्ञता वैश्विक स्तर की है। विशिष्ट अतिथि दुर्योधन सेठी वित्त अधिकारी, केंद्रीय विश्वविद्यालय ओडिशा ने संस्थान की प्रशासनिक दक्षता और वित्तीय पारदर्शिता को उसकी मजबूत पहचान का आधार बताया। समारोह का समापन सांस्कृतिक संध्या के साथ हुआ। इसमें संस्थान के छात्रों और कर्मचारियों ने रंगारंग प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम का संचालन मुख्य वैज्ञानिक डॉ. डी. पी. कानूंगो ने किया। प्राथमिकता : थ्रीडी प्रिंटिंग और टिकाऊ तकनीक संस्थान के निदेशक प्रो. आर. प्रदीप कुमार ने विकसित भारत के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि संस्थान थ्रीडी कंक्रीट प्रिंटिंग, डिजिटल डिजाइन और जलवायु-संवेदनशील अवसंरचना विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन्होंने सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल निर्माण तकनीकों को भविष्य की प्राथमिकता बताया। आपदा प्रबंधन पर वैज्ञानिक कार्यशाला स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में क्रायोस्फेरिक आपदाओं में प्रगति विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें एनडीएमए के निदेशक डॉ. ओ. पी. मिश्रा ने हिमालयी क्षेत्रों में हिमस्खलन और रॉक-आइस घटनाओं से निपटने के लिए तकनीकी समाधानों पर चर्चा की।
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