कोलकाता 12 फरवरी (आरएनएस)। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बुधवार को आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी देश की एकमात्र ऐसी मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने अपने ही सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (डीए) देने से बचने के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख किया। कोलकाता में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कई लोगों की मौत का आरोप लगाया था, जबकि वास्तव में इस प्रक्रिया के कारण किसी की मृत्यु नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि राज्य के कई कर्मचारी वर्षों से बकाया महंगाई भत्ता नहीं मिलने से निराश थे। यादव ने कहा कि यह बजट तृणमूल का अंतिम बजट नहीं, बल्कि उनका विदाई पत्र है। यह राज्य वैज्ञानिक सत्येंद्रनाथ बोस और आचार्य जगदीश चंद्र बोस की भूमि है, फिर भी यहां विज्ञान शिक्षा के लिए कम बजट और मदरसों के लिए अधिक अनुदान दिया गया है। मदरसों के लिए 5,713.61 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। उत्तर बंगाल में 3 करोड़ लोग रहते हैं, लेकिन बजट में केवल 910 करोड़ रुपये दिए गए. मदरसों के नाम पर धन वितरित किया जा रहा है। देश का कुल जीडीपी 4.18 से 4.19 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जो विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मंत्री ने कहा कि एक वेलफेयर स्टेट का दायित्व तीन प्रमुख विषयों पर केंद्रित होता है – निवेश और रोजगार में वृद्धि, रोजगार से आम नागरिकों की समृद्धि और उस समृद्धि को समाज के सभी वर्गों तक पहुंचाना. इसी दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह बजट प्रस्तुत किया है।
–

