नई दिल्ली , 15 फरवरी (आरएनएस)। देशभर में फास्टैग (स्न्रस्ञ्जड्डद्द) का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों वाहन मालिकों पर इन दिनों साइबर ठगों की पैनी नजर है। डिजिटल टोल भुगतान की बढ़ती लोकप्रियता का फायदा उठाते हुए अपराधी फर्जी वेबसाइटों और नकली क्यूआर (क्तक्र) कोड के जरिए लोगों की गाढ़ी कमाई उड़ा रहे हैं। इस बढ़ते खतरे को देखते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (हृ॥्रढ्ढ) ने सभी वाहन चालकों को अलर्ट करते हुए केवल आधिकारिक प्लेटफॉर्म का ही इस्तेमाल करने की सख्त हिदायत दी है। इस तरह काम करता है ठगी का यह नया नेक्सस साइबर अपराधी वाहन चालकों को फंसाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। लोगों के मोबाइल पर अचानक फास्टैग का बैलेंस कम होने, अकाउंट ब्लॉक होने, केवाईसी (्यङ्घष्ट) अपडेट करने या सस्ते वार्षिक पास का लालच देने वाले फर्जी एसएमएस या व्हाट्सएप मैसेज भेजे जाते हैं। इन मैसेजों में तुरंत रिचार्ज करने के लिए एक लिंक या क्यूआर कोड दिया जाता है। जब कोई यूजर इस लिंक पर क्लिक करता है, तो उसे हूबहू असली सरकारी पोर्टल जैसी दिखने वाली एक नकली वेबसाइट पर भेज दिया जाता है। वहां फास्टैग आईडी, वाहन नंबर, मोबाइल नंबर और ओटीपी (ह्रञ्जक्क) जैसी संवेदनशील जानकारियां मांगकर ठग चंद सेकंड में बैंक खाते से पैसे उड़ा लेते हैं। टोल प्लाजा के साइनबोड्र्स पर भी चिपकाए जा रहे हैं फर्जी क्यूआर कोड हैरानी की बात यह है कि अपराधी अब सीधे टोल प्लाजा को भी निशाना बना रहे हैं। कई मामलों में टोल प्लाजा के साइनबोर्ड पर फर्जी क्यूआर कोड के स्टिकर चिपका दिए जाते हैं और जल्दबाजी में ड्राइवर इन्हें असली समझकर स्कैन कर लेते हैं। मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक, जनवरी 2026 में दिल्ली के एक सेल्स प्रोफेशनल के साथ ठीक ऐसा ही हुआ। उन्होंने टोल प्लाजा के पास लगे एक क्यूआर कोड को स्कैन किया और कुछ ही मिनटों में उनके खाते से 5,000 रुपये कट गए। साल 2025 के अंत से इस तरह के मामलों में काफी तेजी देखने को मिली है, जिसमें पैसों के नुकसान के साथ-साथ फास्टैग अकाउंट के दुरुपयोग का भी बड़ा खतरा रहता है। फर्जीवाड़े से बचने के लिए इन बातों का रखें खास ध्यान इस तरह की धोखाधड़ी से बचने का सबसे कारगर तरीका सतर्कता है। फास्टैग रिचार्ज करने के लिए हमेशा आधिकारिक बैंक ऐप, सरकारी पोर्टल या किसी भरोसेमंद मोबाइल ऐप का ही इस्तेमाल करें। किसी भी अनजान वेबसाइट का पता यानी यूआरएल (क्ररु) हमेशा ध्यान से जांच लें, क्योंकि नकली वेबसाइटों के डोमेन नेम में अक्सर मामूली सा बदलाव होता है। इसके अलावा सार्वजनिक जगहों या किसी अनजान मैसेज से मिले क्यूआर कोड को स्कैन करने की गलती बिल्कुल न करें। अपना ओटीपी, पिन या बैंक डिटेल्स किसी के साथ साझा न करें, क्योंकि कोई भी आधिकारिक एजेंसी कभी भी मैसेज या कॉल पर ये जानकारियां नहीं मांगती है। सुरक्षित लेनदेन के लिए अपने बैंक के एसएमएस और ईमेल अलर्ट हमेशा चालू रखें। ठगी का शिकार होने पर तुरंत उठाएं ये कदम तमाम सावधानियों के बावजूद अगर आपको लगता है कि आप साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं, तो तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें और अपना फास्टैग वॉलेट या बैंक अकाउंट ब्लॉक करवा दें। इसके साथ ही बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं और स्थानीय पुलिस को भी मामले की सूचना दें। किसी भी तरह की तत्काल मदद या फास्टैग से जुड़ी परेशानी के लिए आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर 1033 पर भी तुरंत संपर्क किया जा सकता है।
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