शिक्षा मंत्री का दावा, लापरवाही के कारण 10 हजार करोड़ से वंचित रहा बंगाल
कोलकाता 15 फरवरी (आरएनएस)। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ममता बनर्जी सरकार की नीतियों पर उंगली उठाते हुए कहा कि, इस राज्य सरकार की नीति के कारण यहां शिक्षा व्यवस्था पर प्रभाव पड़ा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दावा करते हुए कहा कि ममता बनर्जी सरकार ने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू नहीं की। राष्ट्रीय शिक्षा नीति मातृभाषा में शिक्षा की बात करती है, और पश्चिम बंगाल में यह बंगाली होनी चाहिए थी। पश्चिम बंगाल सरकार बंगाली में शिक्षा की अनुमति नहीं देना चाहती. उनके अनुसार, पश्चिम बंगाल में देश के कुल स्कूलों में से लगभग 50 प्रतिशत ऐसे स्कूल हैं जहां एक भी शिक्षक नहीं है। देश में सबसे ज्यादा शिक्षक-विहीन स्कूल अगर कहीं हैं, तो वो पश्चिम बंगाल में हैं। यही नहीं, राज्य सरकार की राजनीतिक जिद के कारण बंगाल ने केंद्र से मिलने वाले 10,000 करोड़ रुपये भी गंवा दिए हैं।
बीजेपी द्वारा आयोजित शिक्षक सम्मेलन में धर्मेंद्र प्रधान ने जो आंकड़े रखे, वे किसी भी अभिभावक की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं। बंगाल में लगभग 4,000 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी शिक्षक नहीं है। पूरे देश में जितने भी स्कूल बिना शिक्षकों के चल रहे हैं, उनमें से 50त्न अकेले पश्चिम बंगाल में हैं। यानी बाकी पूरा देश एक तरफ और ममता का बंगाल एक तरफ। शिक्षा व्यवस्था में आई यह गिरावट बताती है कि टीएमसी सरकार के राज में बच्चों के भविष्य के साथ कैसा खिलवाड़ हो रहा है। धर्मेंद्र प्रधान ने आरोप लगाया कि ममता सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को अहंकार का मुद्दा बना लिया है. बार-बार अनुरोध करने के बावजूद बंगाल सरकार ने एनईपीलागू नहीं की। नतीजा यह हुआ कि समग्र शिक्षा मिशन के तहत मिलने वाली 10,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त केंद्रीय निधि राज्य को नहीं मिल पाई. केंद्रीय मंत्री ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि एनईपी मातृभाषा (बंगाली) में पढ़ाई की बात करती है, लेकिन ममता सरकार इसे लागू नहीं करना चाहती। क्या राज्य सरकार बंगाली में शिक्षा की अनुमति नहीं देना चाहती? केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पश्चिम बंगाल में घुसपैठ एक गंभीर मुद्दा है। राज्य को घुसपैठियों के हवाले किया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री ने केंद्र की ‘पूर्वोदयÓ विकास विजन का भी जिक्र किया। कहा कि भारत की समग्र प्रगति पूर्वी राज्यों के उत्थान पर निर्भर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस दृष्टिकोण को सामने रखने का श्रेय देते हुए उन्होंने कहा कि कोलकाता पूर्वोदय की राजधानी है। पूर्व के विकास की पहली किरण कोलकाता से आनी चाहिए। धर्मेंद्र प्रधान ने आरोप लगाया कि तृणमूल सरकार बंगाल को घुसपैठियों के हवाले करने और बंग भंग जैसी स्थिति को आमंत्रित करने की योजना बना रही है। ओडिशा भी इससे प्रभावित हुआ है। केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार चरम पर है, जबकि गरीबी देश को नुकसान पहुंचा रही है। तृणमूल कांग्रेस सरकार पर जोरदार हमला बोलते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने सत्ता परिवर्तन की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने प्रशासन को भ्रष्टाचार और घुसपैठ के हवाले कर दिया है। उन्होंने कहा कि बंगाल में इस भ्रष्ट सरकार को हटाने का समय आ गया है। उन्होंने लोगों से भाजपा के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार बनाने की दिशा में काम करने का आह्वान किया।
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