बीरभूम 16 फरवरी (आरएनएस)। बंगाल के बीरभूम जिले में स्थित तारापीठ जहां मां तारा काली की उपासना व तंत्र साधना के लिए विश्व विख्यात है। ऐसे में उक्त खबर के लिखे जाने तक तारापीठ मंदिर अंचल में माता के भक्तों की इस कदर भारी भीड़ उमड़ रही थी कि पैर रखने के लिए भी जगह कठिनता से मिल रही थी। चतुर्दशी के साथ ही, शिवरात्रि मां तारा के अन्यन्य भक्त वामाखेपा के आविर्भाव दिवस व अमावस्या के एक साथ अद्भुत संयोग के कारण तारापीठ में भक्तों की भीड़ लगातार उमड़ रही थी। आज सूर्य ग्रहण (मंगलवार) सहित अमावस्या के कारण मां तारा के भक्तों की भीड़ और व्यापक तौर पर उमड़ सकती है। तारामाता सेवायत संघ के अध्यक्ष तारामय मुखर्जी ने बात करने पर कहा कि, उपरोक्त अद्भुत संयोग के कारण हजारों-हजारों की संख्या में तारा माता के भक्त तारापीठ मंदिर पहुंचे हैं और मंगलवार को भीड़ और काफी हो सकती है। तारामय मुखर्जी ने कहा कि, माता करुणा की सागर है और वह हर किसी की सुनती हैं और उनके दुखों को दूर करती हैं। यहां से कोई खाली हाथ नहीं जाता है। तारा माता सेवायत संघ के अध्यक्ष तारामय मुखर्जी ने कहा कि, यहां बिहार, झारखंड, यूपी, एमपी, छत्तीसगढ़ सहित देश के हर प्रदेश से माता के भक्त आते हैं। एक सवाल के जवाब में अध्यक्ष ने कहा कि, जहां तक भक्तों को परेशान करने की बात है तो हर लाल कपड़ा पहनने वाला आदमी माता का पंडा या पुजारी नहीं हो सकता है। अगर किसी के साथ कुछ गलत हुआ है तो उन्हें जानकारी मिलने पर कार्रवाई होगी। बता दे कि तारापीठ में स्थित महा श्मशान घाट मां तारा के रूप में देवी सती और काली की पूजा करने के लिए हिंदू धर्म के अन्यतम पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यहां भगवान शिव की पत्नी सती की तीसरी आंख का तारा गिरा था, जिससे यह तारापीठ बना। देवी सती की तीसरी आंख का तारा, शक्ति, विनाश और क्रोध का प्रतीक है।

