सीएम ने चुनाव आयोग को ‘तुगलकी आयोगÓ करार दिया
जगदीश यादव
कोलकाता 17 फरवरी (आरएनएस)। चुनाव आयोग व बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के बीच हर रोज तनातनी देखने को मिल रही है। हालात तो यह हो गए है कि आयोग व राज्य सरकार के बीच की खाई काफी गहरी हो गई है। ऐसे में उक्त राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर आयोग व केन्द्र की मोदी सरकार को निशाने पर लिया। सीएम ममता उन अधिकारियों के समर्थन में खड़ी नजर आईं। जिन पर चुनाव आयोग की गाज गिरी है। सीएम ममता ने साफ कहा, जिनका डिमोशन किया जाएगा, उन्हें हम प्रमोशन देंगे।उन्होंने यह संकेत भी दिया कि राज्य सचिवालय नवान्न फिलहाल उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करने के मूड में नहीं है। रविवार को निर्वाचन आयोग ने राज्य के सात अधिकारियों को सस्पेंड करने का निर्देश देते हुए नवान्न को पत्र भेजा और तुरंत आदेश पालन करने को कहा है। 24 घंटे के भीतर ही आयोग ने सीधे उन सातों अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया। लेकिन सीएम ने साफ कर दिया वह कोई कार्रवाई के मूड में नहीं हैं।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को ‘तुगलकी आयोगÓ करार देते हुए आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ‘तुगलकीÓ तरीके से काम कर रहा है और ‘हिटलरशाहीÓ चला रहा है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव से पहले ही चुनाव कराने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हरियाणा और महाराष्ट्र में भी कथित तौर पर इसी तरह की घटनाएं हुई हैं। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि बिहार में ‘एसआईआरÓ के दौरान जिन दस्तावेजों को मान्य माना गया था, वही दस्तावेज बंगाल में क्यों स्वीकार नहीं किए जाएंगे। उनके मुताबिक, बिहार में जहां 11 बिंदु थे, वहीं बंगाल में उसे बढ़ाकर 13 बिंदु कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर फिर से गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग अब किसी राजनीतिक पार्टी के इशारे पर काम कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा आईटी सेल की महिला पदाधिकारी ने एआई का इस्तेमाल कर 58 लाख वोटरों के नाम हटा दिए। सीएम ममता ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी कर रहा है, वोटरों को निशाना बना रहा है और लोकतंत्र को कमजोर कर रहा है। ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई लड़ेगी। ममता बनर्जी ने दावा किया कि इस प्रक्रिया की वजह से लोगों में डर और तनाव का माहौल है। उन्होंने कहा कि एसआईआर से जुड़े तनाव और काम के दबाव के कारण राज्य में 160 लोगों की जान चली गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए चिंता की बात है और उनकी सरकार इस मुद्दे को मजबूती से उठाएगी। मुख्यमंत्री ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या एक संवैधानिक संस्था को महिलाओं और गरीबों को इस तरह अपमानित करने का अधिकार है? यह लोकतंत्र है, तानाशाही नहीं। बिहार में एसआईआर प्रोसेस के लिए जो नियम वह बंगाल में अलग क्यों है ? जो डॉक्यूमेंट्स बिहार में एलिजिबल हैं, उन्हें बंगाल में क्यों बाहर रखा गया है, बिहार में फैमिली रजिस्टर माना जा रहा है लेकिन बंगाल में क्यों नहीं ? सीएम ममता ने बंगाल को वंचित करने की गहरी साजिश का आरोप लगाते हुए साफ कर दिया की उनकी लड़ाई जारी है और वह किसी के सामने झुकने को तैयार नहीं हैं।
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