नई दिल्ली/कोलकाता 20 फरवरी (आरएनएस)। बंगाल की ममता सरकार को आज साफ तौर पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ-साफ चेताया कि, अगर एसआईआर का काम नहीं हुए तो बंगाल में चुनाव नहीं करा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर मामले में राज्य सरकार के सहयोग न करने पर कड़ी नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश ने साफ कहा कि चुनाव के लिए साफ-सुथरी मतदाता सूची जरूरी है और इसमें राज्य सरकार का सहयोग जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि वोटर रोल क्लीन-अप ड्राइव को लेकर राज्य सरकार और इलेक्शन कमीशन के बीच ब्लेम गेम चल रहा है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा, ‘आरोप-प्रत्यारोप का एक दुर्भाग्यपूर्ण माहौल है जो दो संवैधानिक अधिकारियों यानी राज्य सरकार और इलेक्शन कमीशन के बीच भरोसे की कमी दिखाता है। अब, प्रोसेस उन लोगों के क्लेम और ऑब्जेक्शन के स्टेज पर अटका हुआ है जिन्हें डिसक्रिपेंसी लिस्ट में शामिल किया गया है।Ó सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट से कहा कि वह डिस्ट्रिक्ट जज रैंक के मौजूदा और पूर्व ज्यूडिशियल ऑफिसर्स को भी एसआईआर के काम के लिए फ्री करे।इस प्रोसेस में ज्यूडिशियल ऑफिसर्स को इलेक्टोरल रजिस्टर ऑफिसर्स (ईआरओ) का काम करना होगा। कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल में असाधारण हालात के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है। साथ ही माना कि इस निर्देश से नियमित अदालतों में मामलों की सुनवाई प्रभावित हो सकती है, क्योंकि न्यायिक अधिकारियों का समय एसआईआर प्रक्रिया में लगेगा। ममता बनर्जी की ओर से दाखिल याचिका पर शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने सुनवाई की। राज्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि 21 फरवरी तक समयसीमा बढ़ाई गई थी, लेकिन 15 फरवरी को ही आयोग ने दस्तावेज अपलोड करना बंद कर दिया। वहीं, आयोग की ओर से पेश वकील डीएस नायडू ने राज्य सरकार पर अधिकारियों की उपलब्धता सुनिश्चित न करने का आरोप लगाया। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के रुख पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वह ईआरओ-एईआरओ के लिए योग्य अधिकारियों की व्यवस्था करने में विफल रही है। कोर्ट ने भड़काऊ और धमकी भरे भाषणों के मामलों पर भी कड़ी टिप्पणी की। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि दुर्भाग्य से ऐसे बयान अक्सर चुनाव के दौरान दिए जाते हैं और आरोप-प्रत्यारोप का माहौल दो संवैधानिक संस्थाओं- चुनाव आयोग और राज्य सरकार- के बीच भरोसे की कमी दर्शाता है। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को प्राप्त शिकायतों और उठाए गए कदमों का ब्योरा देते हुए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई मार्च के पहले सप्ताह में होगी। पीठ ने तार्किक विसंगति सूची में शामिल व्यक्तियों के दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए न्यायिक अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति का आदेश दिया। इसने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से पश्चिम बंगाल में एसआईआर के काम में सहायता के लिए न्यायिक अधिकारियों को मुक्त करने और पूर्व न्यायाधीशों को खोजने के लिये कहा। पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए ‘एÓ श्रेणी के पर्याप्त अधिकारियों को उपलब्ध नहीं कराने पर कड़ा रुख अपनाया।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को 28 फरवरी तक राज्य में मतदाताओं की मसौदा सूची प्रकाशित करने की अनुमति दी और साथ ही निर्वाचन आयोग को बाद में पूरक सूचियां जारी करने की भी अनुमति दी। पीठ ने राज्य के जिलाधिकारियों और एसपी को निर्देश दिया कि वे जारी एसआईआर कवायद के लिए तैनात न्यायिक अधिकारियों को सहायता और सुरक्षा प्रदान करें और साथ ही यह स्पष्ट किया कि न्यायिक अधिकारियों द्वारा पारित आदेशों को न्यायालय के आदेश के समान माना जाएगा।

