कोलकाता 20 फरवरी (आरएनएस)। पश्चिम बंगाल में बाबर के नाम पर बाबरी मस्जिद बनाने पर रोक लगाने संबंधी एक याचिका को खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि यह मामला उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। गौरतलब है कि बंगाल के मुर्शिदाबाद में टीएमसी के एक निलंबित विधायक के नेतृत्व में बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाया जा रहा है। इस कारण विवाद गहरा गया है।
विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने आज सुनवाई के बाद याचिका को सीधे खारिज करते हुए मामले में कोई दखल देने से इनकार कर दिया। यह फैसला ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में ‘बाबरी मस्जिदÓ नाम से एक नई मस्जिद के निर्माण को लेकर विवाद गहरा हुआ हुआ है। याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि मुगल शासक बाबर को हिंदू विरोधी आक्रांता माना जाता है, इसलिए उनके नाम पर कोई मस्जिद नहीं बननी चाहिए। याचिका में विशेष रूप से मुर्शिदाबाद में निर्माणाधीन मस्जिद का जिक्र किया गया था, जहां निलंबित टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर द्वारा ‘बाबरी मस्जिदÓ की तर्ज पर एक मस्जिद बनाने का काम चल रहा है। याचिकाकर्ता ने केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश देने की मांग की थी कि देश भर में बाबर या बाबरी मस्जिद के नाम पर कोई निर्माण या नामकरण न होने दिया जाए।
पीठ ने याचिका को सुनने के बाद कहा कि यह मामला अदालत के दखल के दायरे में नहीं आता। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि ऐसी व्यापक रोक लगाने का कोई आधार नहीं है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने बाबर को आक्रांता बताते हुए भावनात्मक अपील की, लेकिन जजों ने इसे कानूनी आधार पर अस्वीकार कर दिया। यह फैसला पश्चिम बंगाल में चल रहे विवाद को नया आयाम देता है. मुर्शिदाबाद के बेलडांगा इलाके में हुमायूं कबीर ने दिसंबर 2025 में ‘बाबरी मस्जिदÓ की आधारशिला रखी थी, जिसे अयोध्या की मूल बाबरी मस्जिद की तर्ज पर बनाया जा रहा है। इस परियोजना पर 50-55 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और इसे दो साल में पूरा करने का लक्ष्य है।

