देहरादून,22 फरवरी (आरएनएस)। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज (जीडीएमसी) में शनिवार को अंगदान और प्रत्यारोपण प्रक्रिया को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। सोटो (स्ह्रञ्जञ्जह्र) उत्तराखंड और मोहन फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने राज्य में मृतक अंगदान (कैडेवर डोनेशन) की दर बढ़ाने और कानूनी बारीकियों पर विस्तार से चर्चा की। ब्रेन डेथ की पहचान और समन्वय पर जोर कार्यशाला का उद्घाटन डीजी हेल्थ डॉ. शिखा जनपंगी, डॉ. प्रीति पंत, डीएमई डॉ. अजय आर्य, अपर निदेशक डॉ. आर.एस. बिष्ट और जीडीएमसी के प्राचार्य व सोटो के नोडल अधिकारी डॉ. अतुल कुमार सिंह ने किया। वक्ताओं ने कहा कि अंगदान के लिए अस्पतालों और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय अनिवार्य है। एम्स दिल्ली के डॉ. दीपक गुप्ता ने ब्रेन स्टेम डेथ की पहचान और डोनर के रखरखाव पर तकनीकी जानकारी दी, जबकि मोहन फाउंडेशन की पल्लवी कुमार ने मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम (ञ्ज॥ह्रञ्ज्र) के कानूनी पहलुओं को समझाया। काउंसलिंग और पुलिस समन्वय की भूमिका कार्यशाला में ‘ब्रेकिंग बैड न्यूज’ सत्र के माध्यम से बताया गया कि अंगदान के लिए शोक संतप्त परिवारों की काउंसलिंग कैसे की जाए। विशेषज्ञों ने आईसीयू टीम, पुलिस और मीडिया के बीच तालमेल की आवश्यकता पर बल दिया ताकि अंगदान की प्रक्रिया पारदर्शी और त्वरित हो सके। इनकी रही मौजूदगी कार्यशाला में एम्स ऋषिकेश, जौलीग्रांट, महंत इंदिरेश अस्पताल, मैक्स और ग्राफिक एरा मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञों सहित पुलिस विभाग के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में मोहन फाउंडेशन के संचित अरोड़ा और सोटो के मुकेश सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यशाला के मुख्य बिंदु: ब्रेन डेथ प्रमाणीकरण के प्रति डॉक्टरों को किया गया जागरूक। मृतक अंगदान प्रक्रिया में कानूनी अड़चनों को दूर करने पर चर्चा। अंगों के पारदर्शी आवंटन के लिए डिजिटल रजिस्ट्रेशन पर जोर।

