कोलकाता/नई दिल्ली 24 फरवरी (आरएनएस)। सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पश्चिम बंगाल एसआईआर मामले में ममता बनर्जी और अन्य की अर्जियों पर सुनवाई करते हुए न्यायिक संसाधनों को बढ़ाने का आदेश दिया है। कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की रिपोर्ट के अनुसार 50 लाख से अधिक आवेदन लंबित हैं, जिन्हें निपटाने के लिए अब झारखंड और ओडिशा के सेवानिवृत्त और मौजूदा न्यायाधीशों की भी मदद ली जाएगी। साफ कहें तो सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल एसआईआर मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को अतिरिक्त सिविल जज तैनात करने की अनुमति दी है। अदालत ने माना कि 294 जज भी दावों के निपटारे के लिए पर्याप्त नहीं हैं और 80 दिन लग सकते हैं। चुनाव आयोग को 28 फरवरी 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की मंजूरी दी गई है। अदालत ने कहा है कि चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखना सबसे जरूरी है। समय कम है और काम बहुत बड़ा है। ऐसे में न्यायिक अधिकारियों की संख्या बढ़ाना जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को अतिरिक्त सिविल जज तैनात करने की अनुमति दे दी है।
सुनवाई के दौरान बताया गया कि अब तक 294 जिला और अतिरिक्त जिला जज एसआईआर के अंतिम चरण में तैनात किए गए हैं। इसके बावजूद यह संख्या पर्याप्त नहीं मानी गई। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि यदि एक जज रोज 250 मामलों की सुनवाई करे तो भी पूरी प्रक्रिया को पूरा करने में लगभग 80 दिन लग सकते हैं। जबकि अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित होनी है। इसलिए समय की भारी कमी है। सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट को ये निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश अतिरिक्त सिविल जज (सीनियर और जूनियर डिवीजन) तैनात कर सकते हैं, जिनके पास कम से कम तीन साल का अनुभव हो।पहले से तैनात जिला और अतिरिक्त जिला जजों के अलावा जरूरत के अनुसार और न्यायिक अधिकारी लगाए जा सकते हैं। यदि राज्य में उपलब्ध जज पर्याप्त न हों तो झारखंड और उड़ीसा हाईकोर्ट से सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों की मदद मांगी जा सकती है। झारखंड और उड़ीसा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से ऐसे अनुरोध पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने को कहा गया है। तैनात न्यायिक अधिकारी एसआईआर प्रक्रिया में आए दावों और आपत्तियों की निगरानी और सत्यापन में मदद करेंगे। पूरी प्रक्रिया समयबद्ध और निष्पक्ष तरीके से पूरी की जाए, यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तीन साल से अधिक अनुभव वाले सिविल जज, चाहे वे सीनियर डिवीजन के हों या जूनियर डिवीजन के, एसआईआर प्रक्रिया में लगा सकते हैं। यदि इसके बाद भी मानव संसाधन की कमी हो तो झारखंड और उड़ीसा हाईकोर्ट से सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों की मदद ली जा सकती है।
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