दशकों पुराने आशियानों पर ‘तेलÓ की धार
प्रयागराज 25 फरवरी (आरएनएस)। दरियाबाद में इंडियन ऑयल पाइपलाइन के लिए मकान गिराने के नोटिस से हड़कंप मच गया। इस पर पूर्व सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह ने मोर्चा संभाला और कहा कि अन्याय नहीं होने देंगे ।
उक्त जानकारी देते हुए सांसद प्रतिनिधि विनय कुशवाहा ने बताया कि प्रयागराज के दरियाबाद क्षेत्र में उस समय तनाव की स्थिति पैदा हो गई, जब इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन की पाइपलाइन के दायरे में आने वाले दर्जनों मकानों को गिराने का सरकारी आदेश जारी हुआ। विशेष बात यह है कि ये मकान यहां पिछले 40-50 वर्षों से बने हुए हैं, जिनमें कई पीढिय़ां पली-बढ़ी हैं। पाइपलाइन की सुरक्षा और तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए प्रशासन ने चिन्हित मकानों को हटाने का निर्देश दिया है।
पूर्व सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह का कहना है कि जब ये मकान बन रहे थे, तब किसी ने आपत्ति नहीं की। अब बुढ़ापे में वे कहाँ जाएंगे?
प्रतिनिधि ने बताया कि सूचना मिलते ही पूर्व सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह भारी संख्या में समर्थकों के साथ दरियाबाद पहुंचे और स्थानीय लोगों के हक में आवाज बुलंद की। मौके पर पहुँचे पूर्व सांसद ने प्रशासन और आईओसी के अधिकारियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा “पचास साल से लोग यहां रह रहे हैं। उनके पास बिजली के बिल हैं, नगर निगम का टैक्स रिकॉर्ड है। अचानक इन्हें अवैध बताकर बेघर करना अमानवीय है। हम विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास इंसानों की कब्र पर नहीं होना चाहिए।
पूर्व सांसद ने वहाँ उपस्थित इंडियन आयल महाप्रबंधक लाइन शेष नारायण से कहा कि जो सात लोगों ने उच्च न्यायालय से स्टे ले रखा है उनका तो मकान नहीं गिरेगा और बाकी लोगों को भी मौका दे कि वो भी न्यायालय से गुहार लगा लें।और यदि पाइपलाइन के लिए जमीन अनिवार्य है, तो नियमानुसार 15-15 फीट दोनों तरफ लिया जाय और पहले प्रभावित परिवारों के लिए उचित मुआवजे और पुनर्वास की व्यवस्था की जाए, अन्यथा एक भी ईंट गिरने नहीं दी जाएगी।
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