पार्टी सेकेंड-इन-कमांड अभिषेक ने दिल्ली के खिलाफ ठोंका ताल
जगदीश यादव
कोलकाता 1 मार्च (आरएनएस)। राज्य में विधानसभा चुनावों के गहमा गहमी के बीच एसआईआर मुख्य मुद्दा बना हुआ है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वोटर लिस्ट में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रोसेस के खिलाफ धरने पर बैठने जा रही हैं। वहीं पार्टी के सर्व भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने घोषणा की है कि वह 6 मार्च को दोपहर 2 बजे से कोलकाता के मेट्रो चैनल (एस्प्लेनेड) पर धरने पर बैठेंगी। अभिषेक ने कहा, पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने 6 तारीख को मेट्रो चैनल पर विरोध प्रदर्शन का कार्यक्रम रखा है। वह धरना देंगी और विरोध करेंगी।अभिषेक ने यह भी इशारा किया कि ममता उस दिन अपने अगले कार्यक्रम की घोषणा कर सकती हैं। शनिवार को वोटर लिस्ट का पहले चरण की तालिका के प्रकाशन के बाद लगभग 6.3 लाख वोटर्स के नाम लिस्ट से बाहर रह गए थे। इसके अलावा, यह भी बताया गया कि दूसरे 6 लाख वोटर्स के नाम कंसीडरेशन स्टेट में हैं। सत्ताधारी पार्टी तृणमूल का आरोप है कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राज्य के मतदाताओं के एक बड़े हिस्से को मताधिकार से वंचित करने के लिए चुनाव आयोग भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है। अभिषेक बनर्जी ने तीखे शब्दों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सीधे चुनौती दी। उन्होंने दावा किया कि 64 लाख मतदाताओं की जांच जानबूझकर दहशत का माहौल बनाने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हेरफेर करने का प्रयास है। अभिषेक ने चेतावनी देते हुए कहा, जिन लोगों पर आपने फैसला सुनाया है, वे छह महीने के भीतर आपको मुकदमे का सामना करने के लिए मजबूर करेंगे। उन्होंने प्रभावित नागरिकों और पार्टी कार्यकर्ताओं से तुरंत ‘फॉर्म 6Ó जमा करके अपना नाम दोबारा दर्ज कराने का आग्रह किया। उन्होंने तर्क दिया कि यदि इतनी बड़ी संख्या में मतदाता ‘जांच के अधीनÓ श्रेणी में रहते हैं, तो आगामी चुनावों की वैधता खतरे में पड़ जाएगी। एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विवाद नया नहीं है; यह पिछले साल अक्टूबर में शुरू हुआ था, जब ममता बनर्जी ने वैध मतदाताओं के बाहर किए जाने की आशंकाएं बार-बार जताई थीं। तृणमूल नेतृत्व इस लड़ाई को दिल्ली तक ले जा चुका है, जहां उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात की और आम जनता पर हो रहे अत्याचार को उजागर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की। पार्टी का दावा है कि भाजपा द्वारा इन बहिष्करणों के लिए निर्धारित लक्ष्य आयोग की हालिया सूचियों के माध्यम से पूरा हो चुका है, जिसके कारण राज्य सरकार और संवैधानिक निकाय के बीच यह अभूतपूर्व “युद्ध” छिड़ गया है। बहरहाल तृणमूल लीडरशिप का दावा है कि प्रशासनिक लापरवाही और एसआईआर के नाम पर जानबूझकर लिए गए फैसलों की वजह से आम लोगों को उनके वोटिंग राइट्स से दूर किया जा रहा है। आरोप है कि माइनॉरिटी, माइग्रेंट वर्कर और मार्जिनलाइज्ड कम्युनिटी के वोटर खास तौर पर प्रभावित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री खुद इसका विरोध करने के लिए सड़कों पर उतर रही हैं और आंदोलन में शामिल हो रही हैं। वैसे पार्टी ने बताया है कि धरना शांतिपूर्ण होगा और चुनाव आयोग से मांग की जाएगी कि बाहर किए गए वोटरों के नाम तुरंत लिस्ट में जोड़े जाएं। इसके अलावा, यह भी संकेत दिया गया है कि अगर जरूरत पड़ी तो आंदोलन बड़ा रूप ले सकता है।
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