अमेरिकी साम्राज्यवाद और युद्ध के खिलाफ शांति और अहिंसा के रास्ता अपनाए
बाराबंकी 2 मार्च (आरएनएस )। ईरान के महान सर्वोच्च नेता, आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की Óहत्याÓ की खबर ने पूरे विश्व के सभी समुदाय, न्यायप्रिय मानवता एवं शांतिप्रिय शक्तियों को गहन शोक में डाल दिया है। यह घटना मात्र एक नेता की हत्या नहीं, बल्कि Óइंसानियत की हत्याÓ है। एक ऐसी क्रूरता जो साम्राज्यवादी ताकतों द्वारा समर्थित युद्ध और आक्रामकता का स्पष्ट प्रमाण है, और जो क्षेत्रीय स्थिरता तथा वैश्विक शांति को गंभीर खतरे में डाल रही है। जिले के किंतूर गांव से इस्लामी क्रांति के प्रणेता आयतुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी के पारिवारिक संबंध सदियों पुराने हैं। उनके दादा सैयद अहमद मुसवी हिंदी इसी पवित्र माटी में जन्मे थे, जिन्होंने 19वीं शताब्दी में ईरान जाकर इस्लामी विद्वता की मजबूत नींव रखी। इसी आध्यात्मिक विरासत पर चलते हुए आयतुल्लाह खुमैनी ने 1979 की इस्लामी क्रांति का नेतृत्व किया, और आयतुल्लाह ख़ामेनेई उनके विचारों के प्रबल अनुयायी, निकटतम सहयोगी एवं उत्तराधिकारी के रूप में ईरान को मजबूत, स्वतंत्र एवं इस्लामी मूल्यों पर आधारित राष्ट्र बनाने में अग्रणी रहे। लोगों ने कहा कि यह घटना भारत के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। भारत, जो ऐतिहासिक रूप से अहिंसा, शांति और महात्मा गांधी के सिद्धांतों का प्रतीक रहा है, अब मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध और साम्राज्यवादी हस्तक्षेप से प्रभावित हो रहा है। ईरान के साथ हमारे सदियों पुराने सांस्कृतिक, व्यापारिक और ऊर्जा संबंध हैं। इस क्षेत्र में युद्ध का विस्तार भारत की ऊर्जा सुरक्षा, प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक हितों पर गहरा खतरा मंडरा रहा है। हम दृढ़ता से मानते हैं कि साम्राज्यवाद और सैन्य आक्रामकता से कोई भी समस्या हल नहीं होती; बल्कि यह नई जंगें, विनाश और मानवीय संकट पैदा करती है। महात्मा गांधी की अहिंसा की शिक्षाएं हमें याद दिलाती हैं कि सच्ची शक्ति संवाद, न्याय और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में है, न कि बमों और मिसाइलों में। इस दुख की घड़ी में ईरानी राष्ट्र, उनके शोकाकुल परिवार और पूरे इस्लामी जगत के साथ पूर्ण एकजुटता व्यक्त करते हैं। हम उनकी शिक्षाओं-इस्लामी एकता, उत्पीडऩ-विरोध, स्वतंत्रता और शांति की वकालतकृको सदैव स्मरण रखेंगे। साथ ही, हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील करते हैं कि युद्ध और साम्राज्यवादी हस्तक्षेप को रोककर संवाद का मार्ग अपनाया जाए, ताकि क्षेत्र में शांति स्थापित हो सके। इस शोक सभा में किंतूर गांव के सफदर अब्बास काजमी, असद काजमी, निहाल अहमद, डॉ रेहान काजमी सहित नागरिक समाज के विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ता जिसमें प्रमुख रूप से आलोक सिंह, अजहर फैज खान, मनोज तिवारी, ऊषा विश्वकर्मा, रोहित कश्यप, पूजा, लक्ष्मी, अनु, आयशा, मोइन खान शाश्वत पांडे, समीर हाशमी मौजूद रहे।
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