रतलाम, आरएनएस, 02, मार्च। जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित मीडिया संवाद कार्यक्रम के अंतर्गत मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत सुश्री वैशाली जैन द्वारा ङ्कक्च-त्र क्र्ररू त्र अधिनियम 2025 के संबंध में विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया।
भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत ङ्कद्बद्मह्यद्बह्ल क्चद्धड्डह्म्ड्डह्ल – त्रह्वड्डह्म्ड्डठ्ठह्लद्गद्ग द्घशह्म् क्रश5द्दड्डह्म् ड्डठ्ठस्र ्रद्भद्गद्ग1द्बद्मड्ड रूद्बह्यह्यद्बशठ्ठ (त्रह्म्ड्डद्वद्बठ्ठ) ्रष्ह्ल, 2025 (ङ्कक्च-त्र क्र्ररू त्र) विधेयक, 2025 का उद्देश्य विकसित भारत ञ्च2047 के लक्ष्य के अनुरूप ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं आजीविका सुरक्षा को सशक्त बनाना है।
प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि प्रत्येक ग्रामीण परिवार के इच्छुक वयस्क सदस्य को प्रति वित्तीय वर्ष न्यूनतम 125 दिनों का अकुशल रोजगार प्रदान किया जाएगा। यदि 15 दिनों के भीतर कार्य उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो नियमानुसार बेरोजगारी भत्ता देय होगा। मजदूरी का भुगतान 15 दिनों के भीतर अनिवार्य होगा तथा मजदूरी दर केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित की जाएगी, जो महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 की निर्धारित दर से कम नहीं होगी।
जल संरक्षण एवं जल सुरक्षा, ग्रामीण आधारभूत संरचना विकास, आजीविका संवर्धन संरचनाएँ, प्राकृतिक आपदा न्यूनीकरण कार्य सहित विभिन्न विकासात्मक गतिविधियों को प्राथमिकता दी गई है। डिजिटल पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, डिजिटल मॉनिटरिंग, सोशल ऑडिट एवं साप्ताहिक सार्वजनिक प्रकटीकरण की व्यवस्था की गई है।
वित्तीय साझेदारी के तहत केंद्र एवं राज्य के बीच 60:40 का अनुपात रहेगा, जबकि उत्तर-पूर्वी एवं हिमालयी राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 निर्धारित किया गया है। प्राकृतिक आपदा या महामारी जैसी आपात परिस्थितियों में अतिरिक्त रोजगार एवं राहत व्यवस्था के विशेष प्रावधान भी किए गए हैं।
यह विधेयक ग्रामीण भारत को सशक्त, आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा, जिससे रोजगार सृजन के साथ आधारभूत ढांचे एवं आजीविका सुरक्षा को नई गति मिलेगी।
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