मुख्य अंश
इंडियाएआई मिशन के लिए पांच वर्षों के दौरान 10,300+ करोड़ आवंटित, 38,000 जीपीयू तैनात।
प्रौद्योगिकी और एआई इकोसिस्टम में 60 लाख लोग काम कर रहे हैं।
इस वर्ष भारतीय प्रौद्योगिकी क्षेत्र में राजस्व के $280 बिलियन का आंकड़ा पार कर जाने का अनुमान है।
वर्ष 2035 तक एआई भारत की अर्थव्यवस्था में $1.7 ट्रिलियन जोड़ सकता है।
भूमिका
भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) द्वारा संचालित एक नए युग की कगार पर खड़ा है, जहाँ प्रौद्योगिकी जि़न्दगियां बदल रही है और देश की प्रगति को आकार दे बना रही है। एआई अब केवल शोध प्रयोगशालाओं या बड़ी कंपनियों तक ही सीमित नहीं है। यह हर स्तर पर नागरिकों तक पहुँच रहा है। दूरदराज़ के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच को बेहतर बनाने से लेकर किसानों को फसल के बारे में पूरी जानकारी के साथ निर्णय लेने में मदद करने तक, एआई दैनिक जीवन को सरल, स्मार्ट और अधिक कनेक्टेड बना रहा है। यह व्यक्तिगत शिक्षा के माध्यम से कक्षाओं में क्रांति ला रहा है, शहरों को साफ और सुरक्षित बना रहा है, और तेज, डेटा-आधारित शासन के माध्यम से सार्वजनिक सेवाओं को बेहतर बना रहा है।
इंडियाएआई मिशन और एआई उत्कृष्टता केंद्र जैसी पहलें इस परिवर्तन के केंद्र में हैं। ये कंप्यूटिंग पॉवर तक पहुँच का विस्तार कर रही हैं, अनुसंधान का समर्थन कर रही हैं, और स्टार्टअप्स तथा संस्थानों को ऐसे समाधान तैयार करने में मदद कर रही हैं, जिनसे लोगों को सीधे लाभ पहुँचे। भारत का दृष्टिकोण एआई को खुला, किफायती और सुलभ बनाने पर केंद्रित है, यह सुनिश्चित करते हुए कि नवाचार समाज को समग्र रूप से उन्नत करे।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्या है
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) वह क्षमता है जो मशीनों को ऐसे कार्य करने में सक्षम बनाती है जिनके लिए सामान्यत: मानव बुद्धिमत्ता की आवश्यकता होती है। यह सिस्टम्स को अनुभव से सीखने, नई परिस्थितियों के अनुकूल ढलने, और जटिल समस्याओं को स्वतंत्र रूप से हल करने में सक्षम बनाती है। एआई डेटा सेट, एल्गोरिदम और बड़े भाषा मॉडल का उपयोग करके जानकारी का विश्लेषण करता है, पैटर्न पहचानता है, और प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न करता है। समय के साथ, ये सिस्टम्स अपनी प्रदर्शन क्षमता में सुधार करती हैं, जिससे वे मनुष्यों के समान तर्क कर सकें, निर्णय ले सकें, और संवाद कर सकें।
यह समावेशी दृष्टिकोण नीति आयोग की रिपोर्ट, समावेशी सामाजिक विकास के लिए एआई (अक्टूबर 2025) में भी परिलक्षित होता है। रिपोर्ट दिखाती है कि कैसे एआई भारत के 49 करोड़ अनौपचारिक श्रमिकों को स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कौशल विकास, और वित्तीय समावेशन तक पहुँच प्रदान करके सशक्त बना सकता है। यह रेखांकित करती है कि एआई-आधारित उपकरण लाखों ऐसे लोगों की उत्पादकता और लचीलेपन को बढ़ा सकते हैं, जो भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। रिपोर्ट इस बात पर भी जोर देती है कि प्रौद्योगिकी गहरी सामाजिक और आर्थिक खाइयों को पाट सकती है, यह सुनिश्चित करते हुए कि एआई के लाभ हर नागरिक तक पहुँचें।
वर्तमान में भारत में एआई इकोसिस्टम
भारत का प्रौद्योगिकी क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है, इस वर्ष इसके वार्षिक राजस्व के 280 बिलियन अमेरिकी डॉलर का आंकड़ा पार कर जाने का अनुमान है।
प्रौद्योगिकी और एआई इकोसिस्टम में 60 लाख से अधिक लोग काम कर रहे हैं।
देश में 1,800 से अधिक वैश्विक क्षमता केंद्र हैं, जिनमें 500 से अधिक एआई पर केंद्रित हैं।
भारत में लगभग 1.8 लाख स्टार्टअप्स हैं, और पिछले वर्ष लॉन्च हुए नए स्टार्टअप्स में से लगभग 89 प्रतिशत ने अपने उत्पादों या सेवाओं में एआई का उपयोग किया।
नैसकॉम एआई एडॉप्शन इंडैक्स पर, भारत ने 4 में से 2.45 अंक प्राप्त किए हैं, जिससे पता चलता है कि 87 प्रतिशत उद्यम सक्रिय रूप से एआई समाधान का उपयोग कर रहे हैं।
एआई अपनाने में अग्रणी क्षेत्र हैं: औद्योगिक और ऑटोमोटिव, उपभोक्ता वस्तुएँ और खुदरा क्षेत्र, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएँ तथा बीमा और स्वास्थ्य सेवा। ये मिलकर एआई के कुल मूल्य का लगभग 60 प्रतिशत का योगदान करते हैं।
जैसे-जैसे भारत एक समावेशी एआई इकोसिस्टम का निर्माण कर रहा है, इसकी बढ़ती वैश्विक मान्यता इस प्रगति को दर्शाती है। स्टैनफोर्ड एआई सूचकांक जैसी रैंकिंग भारत को
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