कहा, ‘वोटरों को धमकाया तो कोई भी हो खैर नहीं होगीÓ
नकुल कुमार मंडल
कोलकाता 10 मार्च (आरएनएस)। देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बंगाल में बिना हिंसा के वोटिंग की बात कही है। उन्होंने कहा कि, बंगाल में किसी भी चुनावी हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि, ‘ अगर किसी ने वोटरों को धमकाया तो उसकी खैर नहीं होगीÓ। आज एक संवाददाता सम्मेलन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अपना सख्त चेहका दिखाया और कहा, पश्चिम बंगाल में बिना डर और शांतिपूर्ण मतादाव होगा। किसी भी तरह की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि वोटिंग प्रोसेस में शामिल किसी को भी डराया या धमकाया नहीं जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस बारे में कोई शिकायत मिलती है तो सख्त एक्शन लिया जाएगा। साथ ही, उन्होंने कहा कि किसी का भी नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाया जाएगा। साथ ही सवालों के क्रम में मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव कितने चरणों में कराए जाएंगे, इसका अंतिम निर्णय राज्य में जमीनी स्तर पर कानून-व्यवस्था की स्थिति और प्रशासनिक तैयारियों को ध्यान में रखते हुए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि आयोग की पूर्ण पीठ ने पिछले दो दिनों के दौरान राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की है। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस और अन्य संबंधित पक्षों के साथ बैठकें कर चुनावी तैयारियों का जायजा लिया गया। सभी पक्षों ने आयोग को आश्वासन दिया है कि मतदान शांतिपूर्ण, निर्भीक और हिंसामुक्त वातावरण में कराया जाएगा। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि चुनाव कितने चरणों में होंगे, यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था की स्थिति कैसी है और मतदान को सुरक्षित तरीके से कराने के लिए क्या व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक मतदाता बिना किसी भय के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके।
उन्होंने यह भी बताया कि समीक्षा यात्रा के दौरान आयोग की पूर्ण पीठ ने राज्य प्रशासन के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे कानून के शासन को सख्ती से लागू करें और किसी भी प्रकार के दबाव, भय या पक्षपात से मुक्त होकर काम करें। अधिकारियों का निष्पक्ष और पारदर्शी आचरण चुनाव की विश्वसनीयता के लिए अत्यंत आवश्यक है। ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनाव से पहले, मतदान के दौरान और मतदान के बाद होने वाली किसी भी प्रकार की चुनावी हिंसा के प्रति आयोग की नीति शून्य सहनशीलता की है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई भी व्यक्ति चुनावी हिंसा में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के कारण मतदाताओं को हो रही कथित असुविधा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह एक राष्ट्रीय स्तर की प्रक्रिया है, जिसे निर्धारित अंतराल पर सभी राज्यों में लागू किया जाता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष ढंग से और विभिन्न स्तरों के अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी के साथ पूरी की गई है। उन्होंने बताया कि तार्किक विसंगति की श्रेणी में चिन्हित मतदाताओं से जुड़े मामलों की न्यायिक सुनवाई उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप और कलकत्ता उच्च न्यायालय की निगरानी में चल रही है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी वास्तविक मतदाता मतदाता सूची से बाहर न रहे और कोई भी फर्जी नाम सूची में शामिल न हो। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि चुनाव के दौरान पारदर्शिता और निगरानी को मजबूत करने के लिए सभी मतदान केंद्रों पर शत-प्रतिशत वेब टेलीकास्ट की व्यवस्था की जाएगी, ताकि मतदान प्रक्रिया पर लगातार नजर रखी जा सके। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि किसी वैध मतदाता का नाम छूट या कट गया है अथवा मतदाता सूची में नहीं है तो वे फार्म छह भरकर जरुरी दस्तावेजों के साथ नए सिरे से आवेदन करें। उनका नाम शामिल हो जाएगा।
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