जगदीश यादव
कोलकाता 11 मार्च (आरएनएस)। कथित तौर पर देश दुनिया में का रसोई गैस का संकट गहराता जा रहा है। ऐसे में रसोई गैस और कमर्शियल गैस (एलपीजी) को लेकर चिंताओं के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आज (गुरुवार) एक आपात बैठक करेंगी। मुख्यमंत्री ने इस स्थिति के लिए केंद्र सरकार को दोषी ठहराया है। हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एलपीजी की अवैध जमाखोरी के खिलाफ सख्त चेतावनी जारी की है। उपजे हालतों पर मुख्यमंत्री ने जिलों की डीएम और एसपी को कड़ी निगरानी रखने का निर्देश दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार इन कठिन समय में निजी लाभ के लिए कृत्रिम संकट पैदा करने वालों से गैस भंडार जब्त करने में जरा भी संकोच नहीं करेगी।
सीएम ममता ने कहा कि राज्य सरकार खुद पैसे की दिक्कतों का सामना कर रही है। इसके बावजूद, वह इस हालात में आम लोगों की मदद के लिए आगे आ सकती हैं। लेकिन इसका काफी फायदा नहीं होगा। मुख्यमंत्री के मुताबिक, मैं सब्सिडी देना चाहती हूं। इसका कोई फायदा नहीं होगा। क्योंकि, गैस सप्लाई नहीं है! ग्रामीण अचलों से लेकर बंगाल से लेकर शहरों तक हर किसी को इससे दिक्कत हो रही है। मैंने इस बारे में बात की है। मैंने गुरुवार को एक मीटिंग बुलाई है। हमें कुछ दूसरे तरीकों के बारे में सोचना होगा। देखते हैं क्या किया जा सकता है।
बहरहाल ईंधन की कमी का असर जमीनी स्तर पर साफ तौर पर महसूस किया जा रहा है, जहां कुछ परिवार खाना बनाना पूरी तरह बंद करने की कगार पर हैं। साथ ही, परिवहन क्षेत्र में भी भारी उथल-पुथल मची हुई है, जहां रोजाना आने-जाने वाले यात्रियों को ऑटो-रिक्शा के बढ़े हुए किराए का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। इन व्यवस्थागत समस्याओं के समाधान के लिए राज्य प्रशासन कालाबाजारी रोकने और यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रहा है कि उपलब्ध आपूर्ति जनता तक निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पहुंचे। बाजार पर नजर रखने से लेकर लोगों में सख्त संदेश देने के लिए मुख्यमंत्री सड़कों पर उतरेंगी और गैस डीलरों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक करेंगे। इस बैठक का उद्देश्य मौजूदा स्टॉक स्तर का आकलन करना और वितरण चैनलों को सुव्यवस्थित करना है। हितधारकों के साथ सीधे संवाद स्थापित करके, सरकार को उम्मीद है कि वह घबराहट में की गई खरीदारी को रोक पाएगी और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान के बाद से पनपे किसी भी जमाखोरी नेटवर्क को खत्म कर पाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह स्थिति केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय के गलत फैसले की वजह से पैदा हुई है। हाल ही में दो गैस बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिन का गैप जरूरी कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस घोषणा से लोग और भी ज़्यादा पैनिक हो गए हैं। उन्होंने कहा, उन्होंने ऐसा क्यों कहा कि 25 दिन नहीं होने पर लोगों को गैस नहीं मिलेगी? पेट्रोलियम मंत्रालय से हमारी मांग है कि एसआईआर का नाम हटाए बिना और लोगों के अधिकार छीने बिना गैस की समस्या का समाधान किया जाए। इमरजेंसी सेवाओं पर ध्यान दिया जाए। गैस सप्लाई न रोकी जाए। ऑटो, आईसीडीएस, मिड-डे मील, घरों के लिए कुकिंग गैस, छोटे रेस्टोरेंट की समस्याओं का समाधान किया जाए। उन्हें पहले लोगों के बारे में सोचना होगा। यह केंद्र के हाथ में है। हम चाहते हैं कि केंद्र सरकार जल्दी एक्शन ले।
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