कोलकाता 11 मार्च (आरएनएस)। बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को स्वतंत्र, निष्पक्ष और हिंसामुक्त कराने की मांग को लेकर आज कलकत्ता उच्च न्यायालय की खंडपीठ में एक जनहित याचिका दायर की गई है। मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने याचिका को स्वीकार कर लिया है। यह जनहित याचिका उस बयान के एक दिन बाद दायर की गई है जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ने मंगलवार को कोलकाता में कहा था कि भारत निर्वाचन आयोग इस बार चुनावी हिंसा के मामलों में शून्य सहनशीलता की नीति अपनाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया था कि चुनाव से पहले, चुनाव के दौरान और चुनाव के बाद होने वाली किसी भी प्रकार की हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। याचिका में पिछले चुनावों के दौरान हुई चुनावी हिंसा की घटनाओं का उल्लेख किया गया है। इसमें मतदाताओं और विपक्षी दलों के चुनाव प्रतिनिधियों को डराने-धमकाने तथा महिलाओं के साथ दुव्र्यवहार की घटनाओं का भी हवाला दिया गया है।
जनहित याचिका में राज्य के अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तत्काल तैनाती, सभी मतदान केंद्रों पर निगरानी कैमरे लगाने तथा व्यापक स्तर पर वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था करने की भी मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने वर्ष 2018 और 2023 में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के दौरान हुई हिंसा का भी जिक्र किया है, जिनमें कई लोगों की जान गई थी। साथ ही 2021 के विधानसभा चुनावों के दौरान हुई चुनाव बाद हिंसा का भी उल्लेख किया गया है। भारत निर्वाचन आयोग इस बार पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले और चुनाव के बाद होने वाली हिंसा पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रहा है। हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की परिवर्तन यात्रा पर भी राज्य के कई स्थानों पर हमले के आरोप लगे थे, जिनके लिए तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया गया था।
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

