कोलकाता ११ मार्च (आरएनएस)। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती और उनके आवागमन पर अंतिम निर्णय अब भारत निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त पुलिस पर्यवेक्षक लेंगे। यह निर्णय सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, प्रत्येक जिले में संयुक्त टीमें गठित की जाएंगी, जो जमीनी स्तर पर सुरक्षा की जरूरतों का आकलन करेंगी। ये टीमें संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां आवश्यक केंद्रीय बलों की संख्या की सिफारिश करेंगी। अंतिम निर्णय नामित पुलिस पर्यवेक्षकों द्वारा लिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, यह बदलाव राजनीतिक दलों के साथ आयोग की बैठक के दौरान मिले सुझावों के बाद किया गया है। कई दलों के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया था कि पिछले चुनावों में कई बार केंद्रीय बलों का समुचित उपयोग नहीं हुआ और उन्हें उन क्षेत्रों से दूर रखा गया जहां उनकी सबसे अधिक आवश्यकता थी। इसी के मद्देनजर आयोग ने निगरानी व्यवस्था को और सख्त करने तथा सुरक्षा बलों की तैनाती को आवश्यकता के अनुसार सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है। इस बीच आयोग ने राज्य प्रशासन को निर्देश दिया है कि सभी जिलों में उपलब्ध केंद्रीय बलों द्वारा रूट मार्च और क्षेत्र प्रभुत्व अभ्यास का पहला चरण १४ मार्च को रात ८ बजे तक पूरा किया जाए। इन अभ्यासों का उद्देश्य मतदाताओं में विश्वास पैदा करना और चुनाव से पहले मजबूत सुरक्षा व्यवस्था का संदेश देना है। जानकारी के अनुसार, अब तक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की ४८० कंपनियां दो चरणों में पश्चिम बंगाल पहुंच चुकी हैं और आयोग ने इनकी जिला-वार तैनाती भी पूरी कर ली है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने समीक्षा दौरे के दौरान कहा कि चुनावी हिंसा के मामलों में आयोग सख्त और समझौता न करने वाला रुख अपनाएगा। उन्होंने दोहराया कि चुनाव से पहले, दौरान और बाद में होने वाली किसी भी हिंसा के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति लागू की जाएगी।
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