मेरठ ,14 मार्च (आरएनएस)। मेरठ में ऑनलाइन बुकिंग न होने से गैस एजेंसियों पर भीड़ लग रही है। शहरी क्षेत्र में बुकिंग का अंतराल 25 दिन होने से और भी दिक्कत बढ़ गई है। ऑफलाइन गैस बुकिंग के लिए लोग गैस सप्लाई पॉइंट पर लाइन लगा रहे हैं। इंडियन ऑयल कंपनी ने ऑनलाइन बुकिंग के लिए अपना मोबाइल एप भी लॉन्च कर दिया है। लोगों का कहना है कि बुकिंग के बाद भी गैस मिलने में देरी हो रही है।
मेरठ। मेरठ में लगभग 80 गैस एजेंसियों पर 10 लाख गैस उपभोक्ता हैं। जिला प्रशासन की सख्ती के बावजूद गैस एजेंसियों से भीड़ नहीं छंट रही। सिलिंडर की ऑनलाइन बुकिंग नहीं होने के कारण लोग एजेंसियों पर ऑफलाइन बुकिंग कराने पहुंच रहे हैं। इस कारण एजेंसियों पर हंगामा भी हो रहा है। ऑफलाइन बुक कराने के लिए बाद लोग सप्लाई पॉइंट पर भी लाइन में लग रहे हैं।
सर्वर डाउन होने से हो रही दिक्कत
एजेंसी संचालकों का कहना है कि जिले में अभी घरेलू गैस की कोई कमी नहीं है। गैस की सप्लाई निरंतर हो रही है। बुकिंग के नए नियम लागू होने से लोग एजेंसियों पर आ रहे हैं। सर्वर डाउन होने से भी पहले बुक हुए सिलिंडर पहुंचने में समस्या आ रही है। इधर, गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि प्रत्येक उपभोक्ता को सालाना 15 सिलिंडर का कोटा मिलता है। इसके पूरा होने के बाद अगले वित्तीय वर्ष में ही गैस बुक होती थी। पहले अपने कोटे को लोग कितने भी समय में सिलिंडर ले सकते थे।
जिला प्रशासन का दावा, गैस व पेट्रोल-डीजल की है पर्याप्त उपलब्धता
जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह ने शुक्रवार को बताया कि जिले में एलपीजी एवं पेट्रोल-डीजल की पर्याप्त उपलब्धता है। स्थायी रूप से घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है। ओटीपी के जरिए रिफिल डिलीवरी की व्यवस्था करें। किसी भी स्तर पर भ्रम फैलाने एवं अफवाहों को रोकने के लिए पुलिस कड़ी नजर रखे।
डीएम ने गैस वितरण से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए खाद्य तथा रसद विभाग जिला पूर्ति कार्यालय मेरठ में कंट्रोल रूम का गठन किया है। इसके लिए टेलीफोन नंबर 0121-2665277 24 घंटे संचालित रहेगा।
जिलापूर्ति विभाग ने चेताया
जिला पूर्ति अधिकारी विनय कुमार सिंह ने बताया कि जिले के सभी औद्योगिक व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने औद्योगिक परिक्षेत्र में एलपीजी ईंधन के रूप में घरेलू एलपीजी श्रेणी के सिलिंडरों का किसी भी प्रकार से उपयोग न करें। गैस सिलिंडर का दुरुपयोग पाए जाने पर एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर-2000 और बीएनएस की धाराओं में वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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