-एन.पी.ई.पी से जुड़े परियोजना प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत किया जागगा वार्षिक
अयोध्या 16 मार्च (आरएनएस)। आध्यात्मिक चेतना व मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की जन्म स्थली अयोध्या में शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित तथा राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की राष्ट्रीय जनसंख्या शिक्षा परियोजना (एन.पी.ई.पी) के तत्वाधान में तीन दिवसीय (15-17 मार्च) वार्षिक परियोजना समीक्षा बैठक का शुभारंभ हुआ। इस तीन दिवसीय परियोजना समीक्षा बैठक में देश के एक राज्य को छोड़कर सभी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि तथा सभी क्षेत्रीय शिक्षा संस्थानों के एन.पी.ई.पी से जुड़े परियोजना समन्यवक व प्रतिनिधियों द्वारा प्रतिभाग कर वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाएगा।
कार्यक्रम का प्रारंभ माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलन कर मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के माननीय निदेशक प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी जी द्वारा किया गया। इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए प्रो. सकलानी द्वारा आगामी वित्तीय वर्ष हेतु तैयार किए जाने वाले जनसंख्या शिक्षा के कार्यक्रमों हेतु विस्तृत दिशा निर्देश व मार्गदर्शन प्रदान करते हुए प्रतिभागियों से भारतीय सभ्यता व संस्कृति से जुड़कर इसे शिक्षार्थियों के स्तर तक पहुंचाने की बात कही गई, तथा स्वयं में इस प्रकार परिवर्तन करने की अपील की जिससे किशोरावस्था से जुड़ी समस्याओं का उचित समाधान किया जा सके। कार्य की प्रगति समीक्षा करते हुए इस बात पर बल दिया गया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और उसके अनुपालन में तैयार की गई पाठ्यचर्या और पठन पाठन सामग्री को दृष्टिगत रखते हुए इस कार्यक्रम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से जोड़ जोडऩा आवश्यक है। किशोरावस्था से संबंधित चिन्हित समस्त वर्तमान समस्याओं को अति संवेदनशीलता और गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वर्तमान परिपेक्ष में यह बहुत बड़ी चुनौती है जिसका समाधान भारतीय सभ्यता, जीवन शैली और जीवन दर्शन में पहले से विद्यमान है। वर्तमान समय में अधिकांश समस्याएं जो हमें दिखाई दे रही हैं उनपर गंभीरता से विचार करते हुए सभी पहलुओं की समीक्षा करनी चाहिए। इसके साथ ही आधुनिक चिकित्सा पद्धति मनोवैज्ञानिको द्वारा शोध आधारित सुझावों, नवीनतम तकनीक एवं नवाचारों से लाभ तो लेना ही चाहिए किंतु हमें अपनी जीवन शैली को भी भारतीय ज्ञान परंपरा के अनुसार बदलना चाहिए। इन्हीं सब बिंदुओं को नवीन पाठ्यक्रम एवं पाठ्य सामग्री में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद बहुत ही सरल तरीके से उजागर कर रही है। निदेशक महोदय ने अपने उद्बोधन में यह भी सुझाव दिया कि वार्षिक समीक्षा बैठक में केंद्र सरकार से संबंधित विभागों के अधिकारियों तथा राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों को भी आवश्यक रूप से सम्मिलित किया जाना चाहिए़। सभी प्रतिभागियों का स्वागत प्रो गौरी श्रीवास्तव द्वारा, कार्यक्रम की रूपरेखा प्रोफेसर विजय कुमार मालिक द्वारा, धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मुकेश कुमार वर्मा द्वारा व मंच संचालन डॉ. जनार्दन सिंह द्वारा किया गया।
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