नई दिल्ली,16 मार्च (आरएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश में दखल देने से मना कर दिया, जिसमें इस साल जनवरी में मुर्शिदाबाद जिले में बेलडांगा हिंसा के संबंध में राष्ट्रीय जांच एजेंसी की जांच पर रोक लगाने से मना कर दिया गया था.
यह मामला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के सामने सुनवाई के लिए आया. सीनियर वकील कल्याण बनर्जी ने बेंच के सामने पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से पैरवी की. बेंच ने हाई कोर्ट के आदेश को राज्य की चुनौती पर विचार करने से मना कर दिया. बेंच ने कहा कि हाई कोर्ट ने संतुलित नजरिया अपनाया है.
सुनवाई के दौरान, राज्य के वकील ने कहा कि एनआईए को सामग्री सौंपने का आदेश सुप्रीम कोर्ट के 11 फरवरी के आदेश के उलट है, जिसमें हाई कोर्ट से यह जांचने के लिए कहा गया था कि क्या सामग्री के आधार पर मामले में यूएपीए लगाना सही है.
बेंच ने कहा कि फरवरी के आदेश का मकसद हाई कोर्ट को यह तय करना था कि रिपोर्ट के आधार पर यूएपीए का केस बनता है या नहीं, जिसके लिए केस डायरी के सामग्री की जरूरत होती है. हाई कोर्ट ने केस सामग्री को एनआईए को ट्रांसफर करने के ट्रायल कोर्ट के निर्देश पर भी रोक लगाने से मना कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोनों आदेश (ट्रायल कोर्ट का ऑर्डर और उसका अपना ऑर्डर) में कोई टकराव नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, राज्य पुलिस की जांच के दौरान इक_ा किए गए सामग्री को देखकर, यह नतीजा निकलता है कि यूएपीए लगता है, हम यही बताना चाहते थे….यह हाई कोर्ट को तय करना है कि यूएपीए लगता है या नहीं और कैसे लगता है.
दलीलें सुनने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लिया गया नजरिया काफी संतुलित है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले पर सुनवाई नहीं करना चाहता और हाई कोर्ट से कहा कि वह उस तारीख को मामले की सुनवाई करने की कोशिश करे.
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