नई दिल्ली ,20 मार्च (आरएनएस)। दिल्ली में शुक्रवार को एक अनोखा मामला सामने आया. इसमें एक वकील ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच को बताया कि एक भागा हुआ जोड़ा, जो उसे कार पार्किंग में मिला था, सोशल मीडिया रील से बनी गलतफहमी में सुप्रीम कोर्ट आया था कि वे कोर्ट परिसर में शादी कर सकते हैं, मुख्य न्यायाधीश के घर जा सकते हैं, और तुरंत सुरक्षा पा सकते हैं.
वकील ने सीजेआई की बेंच के सामने भागे हुए कपल की सुरक्षा के लिए याचिका का जिक्र किया, जो उन्हें सुप्रीम कोर्ट की पार्किंग में मिला था. वकील ने कहा कि लड़की 19 साल की है, जो बिहार से है, और लड़का 22 साल का है, जो उत्तर प्रदेश से है, और वे सुप्रीम कोर्ट आए थे.
जब वह अपनी कार पार्क कर रही थीं, तो उन्होंने उन्हें कार पार्किंग में पाया, और कहा कि समस्या यह है कि लड़की के माता-पिता उन्हें पेड़ों पर लटकाने की कोशिश कर रहे हैं.
वकील ने पीठ को सूचित किया कि वह जोड़े को दो अन्य वकीलों के साथ तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन ले गईं क्योंकि लड़की और लड़के ने सुरक्षा मांगी थी. हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा देने के बजाय पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेने की कोशिश की.
वकील ने कहा कि उसने पुलिस से कहा कि वह लड़की को पुलिस स्टेशन में नहीं छोड़ेगी और फिर लड़की ने बयान दर्ज कराया कि वह वकील के साथ रहना चाहती है. वकील ने बेंच को बताया कि उन्होंने भागे हुए कपल की सुरक्षा के बारे में मामला 18 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया था. सीजेआई ने पूछा कि वकील दिल्ली हाई कोर्ट के सामने क्यों नहीं गए?
वकील ने कहा कि लड़की बिहार की है. सीजेआई ने कहा, तो क्या हुआ, अगर दिल्ली में उनकी आजादी को खतरा हैज् वकील ने बताया कि वे सोशल मीडिया पर रील देखते हैं और मान लेते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में शादी हो रही है और फिर वे मुख्य न्यायाधीश के घर चले जाते हैं.
वकील ने कहा, सोशल मीडिया की वजह से यह एक अजीब रवैया है… सीजेआई ने पूछा कि ऐसे मामलों में केस करने वाले हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को क्यों बायपास करते हैं. वकील ने जोर देकर कहा कि कपल को सुरक्षा की जरूरत है.
सीजेआई ने साफ किया कि अगर दिल्ली हाई कोर्ट उनकी अर्जी पर विचार करने से मना कर देता है, तो वे सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं, और हमारे दरवाजे आपके लिए खुले हैं.
सीजेआई ने पूछा, आर्टिकल 226 के अधिकार क्षेत्र के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों? उन्होंने आगे कहा कि हाई कोर्ट को ऐसी याचिकाओं से निपटने का अधिकार है. वकील ने ऐसे भागे हुए जोड़े के लिए घर की संभावना का सुझाव दिया और यह एक बड़ा मुद्दा है जिस पर सिर्फ सुप्रीम कोर्ट ही फैसला कर सकता है.
सीजेआई ने कहा कि उन्होंने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में ऐसे कई मामले देखे हैं और वकील से कहा कि उन्हें यह जानकर हैरानी होगी कि उस हाई कोर्ट में उनके लिए एक अलग रोस्टर है.
वकील ने बेंच से अपील की कि वह यह निर्देश दे कि उनके साथ दो पुलिस कांस्टेबल रहें और उन्हें रहने के लिए कोई जगह दी जाए, नहीं तो उन्हें मार दिया जाएगा. सीजेआई ने कहा, बिल्कुल, जिंदगी सबसे कीमती अधिकार है और उन्हें यह अधिकार है और वे किसी भी हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं, उन्होंने आगे कहा कि उन्हें हाई कोर्ट जाना चाहिए.
सीजेआई ने कहा कि अगर हाई कोर्ट राहत देने में नाकाम रहता है, तो पार्टियों को सुप्रीम कोर्ट जाने की आजादी है. बेंच ने यह भी कहा कि वह मामले पर सही तरीके से विचार करने के लिए संबंधित हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार (ज्यूडिशियल) से बात करेगी.
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