0-तेज बारिश, ओलावृष्टि और प्रतिकूल मौसम से प्रभावित किसानों को वैज्ञानिक आकलन के आधार पर त्वरित राहत और बीमा क्लेम सुनिश्चित करने दिए निर्देश
0-किसान-हित, समन्वय, क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट और समयबद्ध सहायता पर आधारित नई कृषि कार्ययोजना पर दिया ज़ोर
नईदिल्ली,20 मार्च (आरएनएस)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को कृषि भवन, नई दिल्ली में देश के कृषि क्षेत्र की समग्र स्थिति की उच्चस्तरीय समीक्षा की। बैठक में हाल के दिनों में कई राज्यों में हुई अतिवृष्टि, तेज बारिश, ओलावृष्टि और अन्य प्रतिकूल मौसमीय परिस्थितियों के कारण किसानों को हुए संभावित नुकसान, उनकी तत्काल जरूरतों, बीमा दावों की प्रक्रिया तथा राहत व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की गई। समीक्षा के बाद मीडिया से बातचीत में चौहान ने स्पष्ट कहा कि हमारा फोकस केवल उत्पादन पर नहीं बल्कि फसल-क्षति के वैज्ञानिक आकलन, बीमे के सही क्लेम और किसानों की त्वरित सहायता पर भी है।
केंद्रीय कृषि मंत्री के निर्देश पर यह समीक्षा बैठक ऐसे समय में आयोजित की गई, जब कई राज्यों में मौसम की अनिश्चितता, फसल-क्षति की आशंका और किसानों की त्वरित सहायता की आवश्यकता प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं ताकि नीति, राहत और मोदी सरकार की विभिन्न योजनाओं की पहुंच तीनों स्तरों पर समन्वित रूप से सुनिश्चित की जा सके।
चौहान ने बैठक में उपस्थित केंद्रीय कृषि सचिव, कृषि आयुक्त तथा सभी वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को जहां भी सहायता की आवश्यकता हो, वहां राज्य सरकारों के साथ समन्वय बनाकर शीघ्र क्रॉप कटिंग प्रयोग, नुकसान का वैज्ञानिक आकलन और त्वरित राहत सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में तेज बारिश, ओलावृष्टि या मौसम की अन्य प्रतिकूल स्थितियों से नुकसान हुआ है, वहां फील्ड स्तर पर समयबद्ध कार्रवाई अनिवार्य है ताकि किसी भी किसान को राहत के लिए इंतजार न करना पड़े।
चौहान ने सभी अधिकारियों को कहा कि राज्यों के साथ तुरंत संवाद करें, संपर्क करें, ताकि ढंग से क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट हो सके, नुकसान का आकलन किया जा सके, और अगर नुकसान किसान को हुआ है तो ठीक ढंग से, वैज्ञानिक तरीके से उनके बीमे के क्लेम बन जाएं ताकि हम अपने किसान भाई और बहनों की मदद कर सकें।
उन्होंने यह भी बताया कि मौसम विभाग ने आगे दो और पश्चिमी विक्षोभ आने की संभावना जताई है, इसीलिए किसानों को क्या सलाह दी जाए, इस पर भी व्यापक स्तर पर चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
प्रतिकूल मौसम, मौसम पूर्वानुमान और जोखिम प्रबंधन
बैठक में मौसम पूर्वानुमान और फसलों की ताज़ा स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई ताकि आने वाले दिनों में संभावित मौसम जोखिमों के अनुसार तैयारी की जा सके। चौहान ने कहा कि कृषि विभाग, राज्यों और संबद्ध संस्थाओं को मिलकर ऐसी कार्ययोजना बनानी चाहिए, जिससे किसान को समय पर सलाह, सहायता और सुरक्षा मिले। उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि क्षेत्र का लक्ष्य केवल उत्पादन नहीं, बल्कि किसान की सुरक्षा, आय स्थिरता और समय पर सहायता होना चाहिए, और फसल-स्थिति, मौसमीय जोखिम, प्रोक्योरमेंट रेडीनेस तथा राहत तंत्र के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाना आवश्यक है।
००
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

