तेहरान ,24 मार्च,। ईरान को अमेरिका की ओर से मध्यस्थों के जरिए संदेश मिला है, जिससे कूटनीतिक बातचीत की संभावना बनती दिख रही है। सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अमेरिका ने कुछ अहम प्रस्ताव भेजे हैं, जिनकी समीक्षा की जा रही है। अधिकारी ने कहा, हमें अमेरिका की ओर से कुछ बिंदु मिले हैं और हम उन पर विचार कर रहे हैं। इससे संकेत मिलता है कि तनाव के बावजूद दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत जारी है।
ईरान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान के साथ समझौता संभव है, जबकि खाड़ी क्षेत्र में तनाव अब भी बना हुआ है। इस स्थिति का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ रहा है और कई देश तनाव कम करने की कोशिशों में जुटे हैं। इससे पहले ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत से इनकार किया था, लेकिन अब उसने माना है कि मध्यस्थों के जरिए प्रस्ताव उस तक पहुंचा है।
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कई देश तनाव कम करने के लिए सक्रिय हो गए हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदेन से फोन पर बातचीत की। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि तुर्की क्या संदेश पहुंचा रहा है, लेकिन यह जरूर सामने आया है कि फिदेन ने कतर, सऊदी अरब, पाकिस्तान, मिस्र, यूरोपीय संघ और अमेरिकी अधिकारियों से भी संपर्क किया है। तुर्की पहले भी ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा चुका है।
मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल-सीसी ने कहा कि उन्होंने ईरान को तनाव कम करने के लिए स्पष्ट संदेश भेजे हैं। मिस्र के विदेश मंत्रालय के अनुसार, वह सभी पक्षों के साथ लगातार संपर्क में है। एक मिस्री अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि संदेश ऊर्जा ढांचे पर हमलों को रोकने से संबंधित हैं। खाड़ी देश भी इस प्रयास में लगे हैं कि संघर्ष ऊर्जा सुविधाओं तक न पहुंचे।
इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच सकारात्मक बातचीत हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के ऊर्जा ढांचे पर संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए टाल दिया गया है। ट्रंप के मुताबिक, हमारी बातचीत बहुत मजबूत रही है और लगभग सभी मुद्दों पर सहमति बन सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान की ओर से प्रतिनिधियों की बातचीत वहां के स्पीकर मोहम्मद बघेर गालिबाफ से हो रही है, जिसे गालिबाफ ने खारिज कर दिया।
गालिबाफ ने इन खबरों को फेक न्यूज बताते हुए कहा कि अमेरिका बाजार को प्रभावित करने और अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए इस तरह की बातें फैला रहा है। ईरान ने इस मुद्दे पर सख्त रुख बनाए रखा है। हालांकि, ट्रंप के बयान के बाद वैश्विक बाजार में कुछ राहत देखी गई और तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं। कुल मिलाकर, ईरान ने यह तो स्वीकार किया है कि अमेरिकी प्रस्ताव उसके पास पहुंचे हैं, लेकिन अब तक उसने किसी तरह की नरमी के संकेत नहीं दिए हैं।
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