लखनऊ, ( आरएनएस )24 मार्च, 2026। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री राकेश सचान के मार्गदर्शन में एक युवा नवाचार को नई दिशा मिली है, जिसने तकनीक और रचनात्मकता को जोडऩे के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को भी प्रोत्साहित किया है। जीएल बजाज संस्थान के यांत्रिक अभियंत्रण के छात्र देव मंथन द्वारा विकसित देश का पहला सौर ऊर्जा आधारित एवं पुनर्भरणीय प्रकाश-प्रक्षेपण फोटो फ्रेम आज नवाचार और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनकर उभर रहा है।यह फोटो फ्रेम अपनी संरचना और कार्यप्रणाली के कारण अत्यंत विशेष है। सामान्य स्थिति में यह बिल्कुल साधारण दिखाई देता है, किन्तु जैसे ही इसके पीछे प्रकाश डाला जाता है, इसमें छिपा हुआ चित्र, अभिकल्प या संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आ जाता है। प्रकाश प्रक्षेपण की अवधारणा पर आधारित यह प्रयोग तकनीकी दृष्टि से जितना आकर्षक है, उतना ही व्यवहारिक भी सिद्ध हो रहा है।इस नवाचार की दिशा उस समय परिवर्तित हुई, जब देव मंथन की भेंट सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री राकेश सचान से हुई। प्रारंभ में यह फ्रेम पारंपरिक विद्युत आधारित पृष्ठप्रकाश पर निर्भर था, जिससे इसकी उपयोगिता सीमित हो जाती थी। मंत्री राकेश सचान ने इस परियोजना का अवलोकन करते हुए इसे सौर ऊर्जा से जोडऩे का सुझाव दिया।यह सुझाव इस परियोजना के लिए निर्णायक मोड़ सिद्ध हुआ। मंत्री का मानना था कि नवाचार केवल तकनीकी दृष्टि से उन्नत ही नहीं, बल्कि टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल भी होना चाहिए। उनके इसी दृष्टिकोण ने एक साधारण प्रारूप को उन्नत और उपयोगी उत्पाद में परिवर्तित करने की दिशा प्रदान की।मंत्री के सुझाव के पश्चात देव मंथन ने अपने मार्गदर्शक विश्वास गुप्ता के साथ मिलकर इस दिशा में कार्य आरंभ किया। लगभग 15 से 20 दिनों तक निरंतर प्रयोग, असफलताओं और सुधारों के बाद उन्होंने ऐसा फ्रेम विकसित किया, जो सौर पैनल के माध्यम से चार्ज होता है और पूर्णत: ताररहित प्रणाली से संचालित होता है। अब यह फ्रेम कहीं भी आसानी से स्थापित किया जा सकता है, चाहे वह घर के भीतर हो या बाहर। यह न केवल विद्युत की बचत करता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।इस संपूर्ण परियोजना में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग की भूमिका भी उल्लेखनीय रही है। मंत्री राकेश सचान के नेतृत्व में विभाग निरंतर युवाओं को नवाचार, नवउद्यम और उद्यमिता के लिए प्रेरित कर रहा है। विभाग के माध्यम से युवाओं को न केवल मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है, बल्कि उन्हें अपने विचारों को उत्पाद में परिवर्तित करने हेतु आवश्यक संसाधन और मंच भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। यह पहल ‘मेक इन इंडियाÓ और ‘आत्मनिर्भर भारतÓ जैसे अभियानों को जमीनी स्तर पर सुदृढ़ बनाने का कार्य कर रही है।देव मंथन अब इस परियोजना को एक नवउद्यम के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। विभिन्न डिजिटल माध्यमों के जरिए वह इस उत्पाद को बाजार तक पहुंचाने की योजना बना रहे हैं। सामाजिक माध्यमों पर उन्हें प्रारंभिक आदेश भी प्राप्त होने लगे हैं, जो इस उत्पाद की उपयोगिता और आकर्षण को दर्शाते हैं। उनका लक्ष्य केवल एक उत्पाद तैयार करना नहीं, बल्कि एक विनिर्माण इकाई स्थापित कर रोजगार के नए अवसर सृजित करना है। यह पहल स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी गति प्रदान कर सकती है।
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