जौनपुर 26 मार्च (आरएनएस )। राम नवमी की तैयारियां जोरो पर चल रही है। ऐसे में गोस्वामी तुलसीदास जी की श्रीरामचरितमानस से यह दोहा बिप्र धेनु सुर संत हित, लीन्ह मनुज अवतार । प्रांसगिक है। इस दोहे में भगवान श्रीराम के अवतरण का उद्देश्य अत्यंत स्पष्ट रूप से बताया गया है। इस दोहे में भगवान राम के अवतार की गूढ़ता, उनकी करुणा और धर्म की स्थापना का भाव समाहित है। बिप्र (ब्राह्मण), धेनु (गाय), सुर (देवता), और संत (संतजन) इन सभी की रक्षा हेतु भगवान ने मनुष्य रूप में अवतार लिया। यह अवतार उनकी निज इच्छा से हुआ, जिसमें उन्होंने माया को पार कर गुणातीत शरीर धारण किया। रामनवमी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक चेतना का जागरण है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान स्वयं अवतरित होकर धर्म की पुन: स्थापना करते हैं।भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, त्याग, सेवा, और सत्य का प्रतीक है। उन्होंने अपने जीवन में हर भूमिका को पूर्णता से निभाया कृ पुत्र, भाई, पति, राजा, और साधक। उनका चरित्र हमें यह सिखाता है कि जीवन में कठिन परिस्थितियों में भी धर्म और सत्य का मार्ग नहीं छोडऩा चाहिए।ब्राह्मणों की रक्षा कृ भगवान राम ने ऋषियों की रक्षा की, उनके यज्ञों को राक्षसों से बचाया। यह धर्म की रक्षा का प्रतीक है। गौ माता भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं। रामराज्य में गौ-पालन और संरक्षण को विशेष महत्व दिया गया। रावण जैसे अधर्मी राजा के आतंक से देवता भी भयभीत थे। भगवान राम ने राक्षसी शक्तियों का अंत कर देवताओं को पुन: स्थिरता दी। संत समाज सत्य और भक्ति का प्रचार करता है। भगवान राम ने संतों को सम्मान दिया, उनके मार्गदर्शन को स्वीकार किया। राम का अवतार केवल राक्षसों के संहार के लिए नहीं था, बल्कि मानवता को एक आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा देने के लिए था। उन्होंने अपने जीवन में कभी भी अहंकार नहीं किया, बल्कि हर कार्य को धर्म के अनुसार किया।रामनवमी पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने जीवन में राम के आदर्शों को अपनाएँ कृ सत्य बोलें, सेवा करें, और धर्म का पालन करें। आज जब समाज में असत्य, अन्याय और अधर्म की प्रवृत्तियाँ बढ़ रही हैं, तब रामनवमी हमें पुन: धर्म की ओर लौटने का आह्वान करती है। यह पर्व हमें आत्मनिरीक्षण करने का अवसर देता है कि क्या हम राम के मार्ग पर चल रहे हैं? रामनवमी का पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक साधना है। यह दिन हमें भगवान राम के जीवन से प्रेरणा लेने और अपने जीवन को धर्ममय बनाने का अवसर देता है। आइए, हम सब मिलकर राम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारें और समाज में प्रेम, सेवा और सत्य की स्थापना करें।
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