० कोरिया मॉडल: जन आंदोलन की अवधारणा
कोरिया, 29 मार्च (आरएनएस)। जल संचय जन भागीदारी अभियान के अंतर्गत लागू 5त्न मॉडल के तहत किसानों ने अपनी भूमि का 5त्न भाग छोटी सीढ़ीदार जल संरचनाओं के लिए समर्पित किया साथ ही सोखता गड्ढे और मनरेगा के अंतर्गत संरचनाएं बनाईं गईं।
सामुदायिक एवं वैज्ञानिक समन्वय
महिलाओं ने नीर नायिका, युवाओं ने जल दूत के रूप में भूमिका निभाई और ग्राम सभाओं के माध्यम से विकेंद्रीकृत योजना को सशक्त बनाया। इससे समुदाय स्वयं कार्यान्वयनकर्ता बना।
2025 की उपलब्धियाँ (जल पुनर्भरण)
जिले में कुल लगभग 2.8 एमसीएम (28 लाख घन मीटर) जल का भूजल में पुनर्भरण हुआ। यह जल मात्रा लगभग 230-235 (12000 द्वश्/ तालाब) बड़े तालाबों के बराबर और 1800 से अधिक (1500 द्वश्/ डबरी) डबरियों के बराबर है। (गणनाएं मानक वैज्ञानिक मानकों एवं सावधानीपूर्वक किए गए आकलन पर आधारित हैं।)
भूजल स्तर में सुधार
सीजीडब्ल्यूबी की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में कोरिया जिले के भूजल स्तर में 5.41 मीटर की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जो इस मॉडल की प्रभावशीलता को दर्शाती है।
2026 में प्रगति
20,612 से अधिक जल संरक्षण कार्य पूर्ण/प्रगति पर हैं जिनके अंतर्गत 17,229 सामुदायिक कार्य तथा 3,383 मनरेगा आधारित संरचनाएँ शामिल हैं।
कलेक्टर का वक्तव्य
जिला कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा—
कोरिया मॉडल की सफलता का मूल आधार जनभागीदारी है। जब समाज स्वयं जल संरक्षण का संकल्प लेता है, तो परिणाम स्थायी और व्यापक होते हैं। हमारा प्रयास है कि हर बूंद को संजोकर आने वाली पीढिय़ों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
कोरिया मॉडल यह प्रमाणित करता है कि जब जनभागीदारी, वैज्ञानिक योजना, शासन और प्रशासनिक नेतृत्व एक साथ कार्य करते हैं, तो जल संरक्षण को एक स्थायी जन आंदोलन में परिवर्तित किया जा सकता है— और यही मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनाए जाने की दिशा में अग्रसर है।
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