रायपुर, 29 मार्च (आरएनएस)। राजधानी के थाना मौदहापारा में व्यापारिक धोखाधड़ी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जहाँ पीडि़त को न्याय पाने के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ीं। शिकायत देने के पूरे 135 दिनों के बाद और प्रदेश के पुलिस महानिदेशक व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से शिकायत करने के बाद, अंतत: मौदहापारा पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
मामले की पृष्ठभूमि
प्रार्थी मोहम्मद शाहनवाज (29 वर्ष), निवासी गुरुनानक चौक, ने आरोपी इमरान नवाब (42 वर्ष) के साथ 23 जून 2021 को एक एचडीडी मशीन खरीदने का सौदा किया था। इस सौदे के एवज में प्रार्थी ने आरोपी को विभिन्न किश्तों में कुल 39 लाख रुपये का भुगतान किया। भुगतान की अंतिम तिथि 3 अप्रैल 2024 थी, लेकिन रकम लेने के बाद भी आरोपी ने न तो मशीन सौंपी और न ही प्रार्थी का पैसा वापस किया।

पुलिसिया उदासीनता और विलंब
प्रार्थी द्वारा मामले की शिकायत काफी समय पहले की गई थी, लेकिन स्थानीय थाने की उदासीनता के कारण महीनों तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई। हार मानकर पीडि़त ने न्याय के लिए उच्चाधिकारियों (डीजीपी और एसपी कार्यालय) से गुहार लगाई। वरिष्ठ अधिकारियों के कड़े रुख और हस्तक्षेप के बाद, 135 दिनों के विलंब से पुलिस हरकत में आई और कल शाम आरोपी के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया।
धाराएं और कार्रवाई
पुलिस ने आरोपी इमरान नवाब के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 406 (आपराधिक विश्वासघात) एवं 506 (आपराधिक धमकी) के तहत एफआईआर दर्ज किया है। प्रार्थी का आरोप है कि पैसे मांगने पर उसे गंभीर परिणाम भुगतने सबूत मिटाने एग्रीमेंट फाड़वाने चेक फाड़वाने और जान से मरवाने की धमकियाँ भी दी जा रही थीं।
यह मामला क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है कि एक गंभीर धोखाधड़ी के मामले में एफआईआर दर्ज करने में इतना लंबा समय क्यों लगा।
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