कहा- सबको पता है कि मै कई बार मौत से लड़कर वापस आई हूं
जगदीश यादव
पुरुलिया 29 मार्च (आरएनएस)। बंगाल में चुनावी घमसान हर रोज तेज हो रहा है। सीएम ममता बनर्जी हर रोज लगातार कई सभाएं कार रहीं है। उन सभाओं से वह भाजपा नीत केन्द्र सरकार पर जुबानी हमले भी कर रहीं हैं। ऐसे में बंगाल के पुरुलिया जिले में एक जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उन्हें मारने की साजिश हो सकती है और उनके अधिकार छीन लिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, वे दावा करते हैं कि मैं हर जगह पट्टियां बांधकर घूमती हूं। अरे नाकारे बेवकूफों, मैं तो कई बार मौत के मुंह से लड़कर वापस आई हूं। जाओ, जाकर अस्पताल से डॉक्टरों की रिपोर्ट ले आओ। क्या तुम्हें जऱा भी शर्म नहीं है? क्या तुम्हें इस बात का अंदाज़ा नहीं है कि मैंने कितना कष्ट सहा है? सिर्फ यहीं नहीं तृणमूल प्रमुख ममता ने वोटर लिस्ट से नाम हटाने और दंगे भड़काने के आरोप भी लगाए। मुख्यमंत्री ममता ने महिला मतदाताओं से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि मतदान के दिन चौकस रहना होगा क्योंकि कुछ लोग दोबारा चुनाव कराने की योजना बना रहें है। लोगों से सीएम ने कहा कि उनलोगों को एकता बनाएं रखना होगा और किसी के उकसावे में नहीं आना होगा। इस दौरान सीएम ममता ने
ने दावा किया कि अगर बंगाल में भाजपा शासन में आई तो लोग मछली, मांस या अंडे नहीं खा पाएंगे। सीएम ममता ने राज्य में चल रहे जोरदार चुनावी अभियान के बीच खान-पान को राजनीतिक मुद्दा बना कर भाजपा पर सवाल उठाया। लोगों को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा एकतरफा सांस्कृतिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देती है और सुझाव दिया कि ऐसी नीतियां बंगाल में पारंपरिक खान-पान की आदतों को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने तर्क दिया कि खान-पान संबंधी विकल्प इस क्षेत्र की पहचान का हिस्सा हैं और चेतावनी दी कि एक अलग राजनीतिक व्यवस्था के तहत लोगों की जीवनशैली बदल सकती है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने मेरे साथ काम करने वाले लगभग सभी अधिकारियों का तबादला कर दिया। कई लोग काम के लिए सड़कों पर घूम रहे हैं।
ममता बनर्जी ने कहा कि पुरुलिया जिला एक सुंदर जिला है और यहां काफी गर्मी है। यहां पहले खेती के लिए जमीन कम थी और तालाब भी कम कटते थे। धीरे-धीरे, हमने मिट्टी बनाने के प्रोजेक्ट बनाए हैं और हजारों एकड़ जमीन को उपजाऊ बनाया है। फसलें उग रही हैं। हमने कई तालाब काटे हैं। पानी भर रहा है। उसके बाद भी पीने के पानी की समस्या है। मैं प्रशासन से इस पर ध्यान देने का अनुरोध करूंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस जिले में बहुत काम हुआ है। पहले पुरुलिया में लोग शाम के बाद बाहर नहीं निकल सकते थे क्योंकि, उस समय जंगलमहल में डर का माहौल था। आज हमारी सरकार आने के बाद जंगलमहल में शांति लौट आई है। एक समय था, जब हर साल 400 लोग मरते थे। जंगलमहल में उनकी हत्या होती थी। आज परिस्थिति बदल गई है।
मुख्यमंत्री ममता ने कहा कि जब मैं पहली बार झाडग़्राम गई थी, तो मैंने तय किया कि आदिवासियों को चावल मुफ्त में दिया जाएगा। एक दिन मैं चुपके से बेलपहाड़ी गांव गई थी। वहां मैंने एक बर्तन में कुछ काला उबलता हुआ देखा। मैंने पूछा कि क्या पक रहा है। उन्होंने कहा कि हमें हफ़्ते में दो दिन खाना मिलता है। बाकी दिन हम जंगल से काली चींटियां पकड़ते हैं। तभी मैंने तय किया कि यह सब नहीं चलेगा।
तृणमूल प्रमुख ने इस मुद्दे को राज्य में चल रही व्यापक राजनीतिक बहसों से जोड़ते हुए विपक्ष पर समाज को बांटने और बंगाल की सामाजिक सद्भाव को बिगाडऩे का आरोप लगाया। उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक रीति-रिवाजों का सम्मान करती है और लोगों की निजी पसंद पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाती है। ये टिप्पणियां पश्चिम बंगाल में अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक अभियान तेज होने के बीच आई हैं, जहां राज्य विधानसभा की सभी 294 सीटों पर दो चरणों में मतदान होगा।
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