दुर्ग, 30 मार्च 2026(आरएनएस) — रसमड़ा हाईवे पर मिला एक लावारिस शव, परिजनों की बेरुखी और समाज की संकीर्ण सोच के बीच जो कहानी शुरू हुई, वह अंत तक आते-आते इंसानियत की सबसे मजबूत जीत बन गई, जब अपने ही खून के रिश्तों ने अंतिम संस्कार से किनारा कर लिया तो अजनबियों ने आगे बढ़कर मेघनाथ देशमुख को वह सम्मान दिया जो हर इंसान का हक है। पुलिस चौकी अंजोरा की टीम ने शव की पहचान ग्राम अंजोरा निवासी मेघनाथ देशमुख के रूप में की और परिजनों को सूचना दी, लेकिन सामाजिक कारणों का हवाला देकर परिवार ने अंतिम संस्कार से साफ इनकार कर दिया, पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की, माहौल भारी था, सवाल बड़ा था—क्या एक इंसान बिना सम्मान के विदा होगा? तभी कहानी ने मोड़ लिया, धारा न्यूज डिजिटल मीडिया के संपादक गुलाब देशमुख ने सोशल मीडिया पर आवाज उठाई, अपील की कि अंतिम संस्कार हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार है, यह बात आग की तरह फैली और लोगों के दिलों को झकझोर गई। मेघनाथ की जिंदगी खुद दर्द से भरी थी, पत्नी पहले ही छोड़कर चली गई थी, विजातीय विवाह करने पर परिवार ने रिश्ता तोड़ लिया, अकेलापन उनका स्थायी साथी बन गया, समाज से कटे हुए उन्होंने घुमंतू जीवन जीया और अंत में जब मौत आई तो कोई अपना नहीं था, लेकिन यहीं इंसानियत ने कदम बढ़ाया। दुर्ग जनपद पंचायत के सीईओ रूपेश पांडे ने तुरंत अंतिम संस्कार की सामग्री उपलब्ध कराई, एक मानव समाज के प्रदेश अध्यक्ष सुबोध देव के मार्गदर्शन और जिला अध्यक्ष नितेश साहू के नेतृत्व में पूरी व्यवस्था बनाई गई, पोस्टमार्टम और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक परिजन मौजूद रहे लेकिन अंतिम संस्कार के समय फिर पीछे हट गए, इसके बाद नव दृष्टि फाउंडेशन के राज अड़तीया, शरद पंसारी, खोमेंद्र साहू और अन्य साथियों ने जिम्मेदारी उठाई और पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया। सबसे भावुक पल तब आया जब गुलाब देशमुख ने खुद मुखाग्नि दी और कहा कि समाज को इस जहर जैसी सोच से बाहर आना होगा, यह सिर्फ एक संस्कार नहीं बल्कि इंसानियत की परीक्षा है, और इस बार इंसानियत जीत गई। यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की विदाई नहीं, बल्कि उस समाज का आईना है जहां रिश्ते हार गए और मानवता जीत गई—याद रखिए, जब तक इंसानियत जिंदा है, तब तक कोई भी लावारिस नहीं होता।
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