बिलासपुर 3 अप्रैल (आरएनएस) चकरभाठा थाना क्षेत्र में करोड़ों की हाईटेक ठगी का ऐसा खुलासा हुआ है जिसने साइबर फ्रॉड के नए खतरनाक चेहरे को उजागर कर दिया, विदेशी निवेश और भारी-भरकम डिमांड ड्राफ्ट के नाम पर रची गई इस सुनियोजित साजिश में प्रार्थी से 3 करोड़ 13 लाख 13 हजार रुपये से ज्यादा की रकम ऐंठ ली गई, मामला तब शुरू हुआ जब जनवरी-फरवरी 2024 में प्रार्थी को एक विदेशी नंबर से व्हाट्सएप मैसेज आया जिसमें खुद को ग्रेट ब्रिटेन निवासी “डॉ. लोव्हीत” बताकर संपर्क किया गया, इसके बाद उसे स्कॉटलैंड निवासी कथित सहयोगी “ग्रेस डेविड” से जोड़ा गया, जिसने भारत में कैंसर अस्पताल, ब्लाइंड इंस्टिट्यूट, रियल एस्टेट और लॉ कॉलेज में 500 करोड़ रुपये निवेश का लालच दिया और प्रार्थी को पार्टनर बनाने का सपना दिखाया, झांसे में आकर प्रार्थी ने प्रोजेक्ट रिपोर्ट तक तैयार कर ली और लगातार संपर्क में बना रहा, फिर 10 जून 2024 को महिला के भारत आने और उसके नाम पर स्कॉटलैंड बैंक से जारी 103 करोड़ रुपये के डिमांड ड्राफ्ट के क्लियरेंस के नाम पर खेल शुरू हुआ, कभी होटल खर्च, कभी एंबेसी प्रोसेस, कभी आरबीआई, कस्टम और प्रवर्तन निदेशालय की औपचारिकताओं के नाम पर बार-बार पैसे मांगे गए, प्रार्थी ने पहले छोटे-छोटे ट्रांजेक्शन किए और फिर आरोपी नवीन जून के खाते में किस्तों में भारी रकम ट्रांसफर कर दी, जब शक गहराया तो मामला थाने पहुंचा, पुलिस ने जांच शुरू की, तकनीकी साक्ष्य, बैंक ट्रेल और डिजिटल डाटा खंगाला गया तो पूरा नेटवर्क सामने आया, जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी नवीन जून पिता आजाद जून उम्र 34 वर्ष निवासी सोनीपत हरियाणा, वर्तमान में देवरी खुर्द थाना तोरवा बिलासपुर में रह रहा था, वही इस ठगी का मास्टरमाइंड निकला, जिसने अपने बैंकिंग अनुभव का फायदा उठाकर फर्जी ईमेल आईडी बनाईं और खुद को बैंक, एंबेसी और सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर पीड़ित को लगातार भ्रमित करता रहा, पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और उसके कब्जे से Thar और Venue जैसी महंगी गाड़ियां, मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप जब्त किए गए, पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल किया और अपने साथियों के साथ मिलकर इस बड़े साइबर फ्रॉड को अंजाम देने की बात स्वीकार की, फिलहाल पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है और पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है, आरोपी के खिलाफ थाना चकरभाठा में अपराध क्रमांक 180/2026 के तहत धारा 318(4), 336(3), 338, 340(2), 61(2), 3(5) बीएनएस एवं 66(घ) आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर न्यायिक कार्रवाई की जा रही है।: चमकदार विदेशी निवेश और बड़े मुनाफे के सपनों के पीछे छिपा यह जाल बताता है—ऑनलाइन भरोसा जितना बड़ा होगा, खतरा उतना ही घातक हो सकता है।
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