रायपुर 8 अप्रैल (आरएनएस) छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले में जांच ने एक और बड़ा मोड़ ले लिया है जहां आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने 8 अप्रैल 2026 को विशेष न्यायालय में नवां पूरक चालान पेश कर दिया है और इस बार कार्रवाई सीधे सत्ता, सिस्टम और सिंडिकेट के गठजोड़ तक पहुंचती दिख रही है, इस पूरक चालान में तीन गिरफ्तार आरोपी—तत्कालीन उप सचिव मुख्यमंत्री सचिवालय सौम्या चौरसिया, कृष्ण कुमार श्रीवास्तव उर्फ के.के. श्रीवास्तव और देवेन्द्र डडसेना—को मुख्य रूप से आरोपित किया गया है, जांच में सामने आया कि देवेन्द्र डडसेना जो राजीव भवन का पुराना एकाउंटेंट रहा है उसने अवैध शराब सिंडिकेट से जुटाई गई रकम को प्राप्त करने, सुरक्षित रखने और निर्देशानुसार आगे भेजने का काम किया जिससे वह इस पूरे आर्थिक अपराध की चेन का अहम हिस्सा बन गया, वहीं के.के. श्रीवास्तव की भूमिका सिर्फ परिवहन तक सीमित नहीं रही बल्कि उसने अवैध नगद राशि के उठाव, एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने, उसके प्रबंधन, निवेश और खपाने तक में सक्रिय भूमिका निभाई और अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर इस नेटवर्क को मजबूत किया, जांच एजेंसी के अनुसार सौम्या चौरसिया ने अपने शासकीय पद का दुरुपयोग करते हुए इस सिंडिकेट को संरक्षण, समन्वय और प्रशासनिक सुविधा उपलब्ध कराई जिससे यह पूरा खेल लंबे समय तक चलता रहा और शासन के राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा, EOW द्वारा दर्ज अपराध क्रमांक 04/2024 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 और 12 के साथ IPC की धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत मामला दर्ज है, अब तक इस पूरे प्रकरण में 51 आरोपियों के खिलाफ अभियोग पत्र पेश किया जा चुका है और जांच अभी भी जारी है जिसमें कई शासकीय, अशासकीय और राजनीतिक कड़ियों के जुड़ने की संभावना जताई जा रही है, यह कार्रवाई सिर्फ एक चालान नहीं बल्कि उस संगठित तंत्र पर सीधा प्रहार है जिसने व्यवस्था के भीतर रहकर ही उसे नुकसान पहुंचाया, साफ है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी इस घोटाले की परतें और गहराती जाएंगी और कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं, यह मामला अब सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि सिस्टम की साख से जुड़ा हुआ है जहां हर खुलासा एक बड़ा सवाल छोड़ रहा है।
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