लखनऊ 8 अप्रैल (आरएनएस )। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कृषि और कृषि से जुड़े क्षेत्रों में असीमित संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि देश की कुल कृषि योग्य भूमि में उत्तर प्रदेश का योगदान 11 प्रतिशत है, जबकि देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में प्रदेश की भागीदारी 21 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश सरकार द्वारा किए गए प्रयासों के कारण कृषि विकास दर 8 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत तक पहुंची है।मुख्यमंत्री आज यहां ‘विकसित कृषि-विकसित भारत 2047Ó के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आयोजित कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के महासंगम, छठी उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान कांग्रेस-2026 के शुभारंभ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने उत्तर प्रदेश कृषि वैज्ञानिक सम्मान योजना 2025-26 के अंतर्गत चयनित वैज्ञानिकों को आजीवन उपलब्धि, विशिष्ट वैज्ञानिक, विशिष्ट महिला वैज्ञानिक, युवा वैज्ञानिक तथा उत्कृष्ट शोध प्रबंध सहित विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया। साथ ही उन्होंने कृषि से संबंधित विभिन्न पुस्तकों का विमोचन भी किया।मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद और इसकी सहयोगी संस्थाओं द्वारा आयोजित इस तीन दिवसीय कृषि विज्ञान कांग्रेस में कृषि और उससे जुड़े विभिन्न विषयों पर व्यापक चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश की सर्वाधिक आबादी वाला राज्य है, जहां देश की लगभग 16 से 17 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है। प्रदेश में उपजाऊ भूमि और पर्याप्त जल संसाधन उपलब्ध हैं तथा देश में सर्वाधिक सिंचित भूमि का प्रतिशत भी उत्तर प्रदेश में है।उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था का आधार प्राचीन काल से कृषि, किसान और कारीगर रहे हैं। पहले किसान केवल उत्पादन ही नहीं करता था, बल्कि कारीगर और उद्यमी के रूप में भी कार्य करता था। उन्होंने कहा कि इतिहास में ऐसी परिस्थितियां बनीं, जिससे किसानों को केवल कच्चा माल उत्पादित करने तक सीमित कर दिया गया, जिससे उनकी आय और उद्यमिता प्रभावित हुई।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में ‘खेती की बात खेत परÓ कार्यक्रम शुरू किया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के कई क्षेत्रों में किसान अब एक के स्थान पर तीन फसलें उगा रहे हैं और मक्का जैसी फसलों से प्रति एकड़ लगभग एक लाख रुपये तक की बचत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले जहां कृषि विज्ञान केंद्रों की स्थिति खराब थी, वहीं अब इन केंद्रों पर नियमित रूप से गोष्ठियां और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने किसानों को बीज उपलब्ध कराने से लेकर उनके उत्पाद की खरीद और मूल्य संवर्धन तक की व्यवस्था सुनिश्चित की है। गन्ना किसानों को समय पर भुगतान किया जा रहा है और अब तक लगभग दो लाख 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि सीधे किसानों के खातों में भेजी जा चुकी है। प्रदेश में चीनी मिलों को आधुनिक स्वरूप दिया गया है और गन्ना उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा सिंचाई सुविधाओं को सुदृढ़ किया गया है। सरयू नहर परियोजना, जो वर्षों से अधूरी थी, उसे पूर्ण कर 14 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा से जोड़ा गया है। किसानों को नि:शुल्क सिंचाई सुविधा देने के साथ ही लाखों ट्यूबवेलों के बिजली बिल माफ किए गए हैं तथा बिना बिजली कनेक्शन वाले ट्यूबवेलों को सौर ऊर्जा से जोडऩे की योजना पर कार्य किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि किसानों की फसलों को जानवरों से बचाने के लिए सौर ऊर्जा आधारित बाड़बंदी की व्यवस्था की जा रही है। प्रदेश में निराश्रित गोवंश के संरक्षण के लिए हजारों गोआश्रय स्थल बनाए गए हैं और प्रत्येक गोवंश के भरण-पोषण के लिए सरकार आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड क्षेत्र में निराश्रित पशुओं की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया गया है।मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि में आधुनिक तकनीक का उपयोग समय की आवश्यकता है। ड्रोन तकनीक, उपग्रह आधारित निगरानी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और जैव प्रौद्योगिकी जैसी तकनीकों के उपयोग से उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि मिट्टी की नमी और पोषण संबंधी जानकारी एकत्र करने के लिए सेंसर तकनीक का उपयोग भी किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से किसानों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत दुर्घटना में मृतक या घायल किसान के परिवार को पांच लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराई जाती है। साथ ही, फसल नुकसान की स्थिति में भी त्वरित राहत प्रदान करने के निर्देश जिलाधिकारियों को दिए गए हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि को लाभकारी बनाने के लिए उत्पादन को उत्पादकता और उत्पादकता को लाभ में बदलने की दिशा में कार्य करना आवश्यक है। उन्होंने वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि वे ऐसे शोध और योजनाएं तैयार करें, जिनसे किसानों की आय बढ़े और कृषि क्षेत्र में स्थायी समृद्धि सुनिश्चित हो सके।कार्यक्रम के दौरान कृषि अनुसंधान परिषद से संबंधित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। इस अवसर पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह ओलख, गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, कृषि अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष कैप्टन विकास गुप्ता सहित अनेक वैज्ञानिक, अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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