प्रतिनिधिमंडल ने विभागीय सचिव और निदेशक को सौंपा ज्ञापन
रांची 9 अपै्रल (आरएनएस)। झारखंड अधिविद्य परिषद रांची (जैक) द्वारा प्रदान की जाने वाली ‘आलिमÓ और ‘फाजिलÓ डिग्री को स्नातक और स्नातकोत्तर के समकक्ष वैधानिक मान्यता देने की मांग को लेकर गुरुवार, 09 अप्रैल 2026 को झारखंड छात्र संघ और ऑल झारखंड मदरसा स्टूडेंट्स यूनियन के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा सचिव और माध्यमिक शिक्षा निदेशक को इस संबंध में एक विस्तृत मांग पत्र सौंपा। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे झारखंड छात्र संघ के अध्यक्ष एस. अली ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य गठन के बाद झारखंड सरकार के ही निर्देश पर जैक द्वारा वर्ष 2003 से लेकर 2023 तक आलिम और फाजिल की डिग्रियां प्रदान की गई हैं। यह डिग्रियां क्रमश: स्नातक और स्नातकोत्तर के समकक्ष हैं।
उन्होंने बताया कि जैक ने इसे ‘बिहार पुनर्गठन अधिनियम 2000Ó के तहत अधिग्रहित कर वर्ष 2006 में अधिसूचित किया था। इससे पूर्व, 1977 में तत्कालीन बिहार सरकार के कार्मिक विभाग ने विशेषज्ञों द्वारा विश्वविद्यालय के अनुरूप तैयार पाठ्यक्रम के आधार पर इन डिग्रियों को स्नातक और स्नातकोत्तर के समकक्ष मानकर अधिसूचित किया था।प्रतिनिधिमंडल ने चिंता जताते हुए कहा कि झारखंड में जैक द्वारा प्रदान की गई इन्हीं डिग्रियों के आधार पर सैकड़ों अभ्यर्थी वर्तमान में विभिन्न सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं। लेकिन मौजूदा समय में सरकार के ही विभिन्न विभागों द्वारा आलिम और फाजिल डिग्री की वैधानिकता को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। छात्र नेताओं ने कहा कि वैधानिकता पर सवाल उठने के कारण मदरसा के छात्रों को उच्च शिक्षा, सरकारी नौकरी और रोजगार के अन्य अवसरों से सीधे तौर पर वंचित किया जा रहा है, जो कि छात्रों के साथ घोर अन्याय है। यूनियन ने सरकार से पुरजोर मांग की है कि छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जाए। जैक द्वारा वर्ष 2003 से 2023 तक दी गई आलिम(बीए) और फाजिल(एमए) की डिग्रियों को झारखंड कार्मिक विभाग और राज्य कैबिनेट द्वारा पुन: अधिसूचित किया जाए, ताकि स्थायी समाधान हो सके। प्रतिनिधिमंडल में ऑल झारखंड मदरसा स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष मो. इमरान, मोहम्मद मेराजउद्दीन, मोकर्रम हयात, अबुल कलाम और अकील जावेद सहित कई अन्य छात्र उपस्थित थे।
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