आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताले, कागजों में चल रही योजनाएं
सुलतानपुर 10 अप्रैल (आरएनएस )। जनपद में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों की जमीनी हकीकत और कागजी दावों में भारी अंतर दिखाई दे रहा है, जिससे विभाग की कार्यशैली संदेह के घेरे में आ गई है। जानकारी के अनुसार, कई आंगनबाड़ी कार्यकत्र्रियां अपने केंद्रों पर नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहतीं। मीटिंग और अन्य कार्यों का बहाना बनाकर केंद्रों से गायब रहना आम बात हो गई है। विशेष रूप से परिषदीय विद्यालयों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताले लटकते देखे जा सकते हैं। आंगनबाड़ी में नामांकित बच्चों की स्थिति भी संदिग्ध बताई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों का वास्तविक उपस्थिति रिकॉर्ड कहीं नजर नहीं आता। वहीं, सरकार द्वारा दिए जाने वाले पोषाहार (पोषक तत्व) केवल कागजों में ही वितरित दिखाए जा रहे हैं। सरकार द्वारा विकसित ‘बाल वाटिकाÓ योजना का भी मजाक बनता नजर आ रहा है। नगर क्षेत्र के कई विद्यालयों में बाल वाटिका सिर्फ कागजों तक सीमित है, जबकि जमीनी स्तर पर इसका कोई ठोस संचालन नहीं दिख रहा। भदैया ब्लॉक के भरथीपुर, भरसड़ा, त्रिलोकचंदपुर और वजूपुर जैसे गांवों में यह स्थिति और भी गंभीर बताई जा रही है। यहां खुलेआम भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि आखिर पोषाहार कहां जा रहा है? क्या संबंधित अधिकारी और कर्मचारी मिलकर बच्चों के हक पर डाका डाल रहे हैं? सबसे चिंताजनक बात यह है कि न तो सीडीपीओ द्वारा नियमित जांच की जा रही है और न ही जिला कार्यक्रम अधिकारी की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नजर आ रही है। ऐसे में आम जनता के मन में शंका और आक्रोश होना स्वाभाविक है। स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि बच्चों को उनका हक मिल सके और सरकारी योजनाएं सही मायनों में धरातल पर उतर सकें।
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