तपती धूप में परिंदों को सहारा,
गांव-गांव पहुंचेगा अभियान पेड़ों, गलियों व घरों में रखे जाएंगे जल-पात्र
लम्भुआ/सुल्तानपुर10 अप्रैल (आरएनएस )। जब झुलसा देने वाली गर्मी जहां इंसानी जीवन को कठिन बना देती है वहीं बेजुबान पशु-पक्षियों के सामने भी अस्तित्व का संकट खड़ा हो जाता है। तपते आसमान और सूखते जलस्रोतों के बीच प्यास से तड़पते परिंदों के सामने भी जल संकट गहराने लगता है। ऐसे कठिन समय में लम्भुआ क्षेत्र का अविरल फाउंडेशन एक सराहनीय और मानवीय पहल के साथ आगे आएगा। अविरल फाउंडेशन के अध्यक्ष भानुकर तिवारी के नेतृत्व में टीम ने संकल्प लिया है कि पूरे क्षेत्र में पक्षियों के लिए जीवनदान अभियान जल्द ही चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत हर घर में जल-पात्र (मिट्टी ) के रखवाए जाएंगे, जिन्हें पेड़ों से बांधा जाएगा या घरों की छतों पर छायादार स्थानों पर स्थापित किया जाएगा, ताकि प्यास से व्याकुल परिंदों को सहज रूप से पानी मिल सके।अध्यक्ष श्री तिवारी ने बताया कि यह पहल केवल एक अभियान नहीं बल्कि समाज के प्रति हमारी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे भीअपने-अपने घरों में पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था कर इस पुण्य कार्य में सहभागी बनें। भीषण गर्मी के इस दौर में जब हर जीव पानी के लिए संघर्ष कर रहा है, ऐसे में अविरल फाउंडेशन की यह पहल निश्चित ही एक मिसाल बनेगी और समाज को एक सकारात्मक संदेश देगी कि छोटी-छोटी कोशिशें भी किसी के लिए जीवनदान बन सकती हैं।श्री तिवारी ने यह स्पष्ट कहा है कि यह पहल केवल घर-घर जल-पात्र बांटने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से समाज में पशु-पक्षियों के प्रति प्यार, स्नेह और संवेदनशीलता का संदेश भी फैलाना उद्देश्य है। श्री अध्यक्ष ने कहा के यदि लोग केवल बर्तन रख दें लेकिन उनके मन में जीवों के प्रति करुणा न हो तो यह अभियान अधूरा रह जाएगा। हमारा प्रयास है कि हर व्यक्ति अपने आसपास के पक्षियों और पशुओं के प्रति जिम्मेदारी समझे। इस अभियान के तहत टीम न सिर्फ जल-पात्र वितरित करेगी बल्कि लोगों को जागरूक भी करेगी कि वे नियमित रूप से उनमें पानी भरते रहें और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखें। भीषण गर्मी में जब हर जीव प्यास बुझाने के लिए हर पल प्यास बुझाने की कोशिश करता है तब वही देखा जाए नन्हे पक्षियों की स्थिति और भी दयनीय हो जाती है। उन्हें पानी की एक-एक बूंद के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। ऐसे तपते मौसम में हर पल जल की आवश्यकता उनके जीवन के लिए अत्यंत अनिवार्य हो जाती है।वहीं यह पहल समाज में संवेदनशीलता जगाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है।
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