—- क्या निलंबन की स्क्रिप्ट पहले ही लिखी जा चुकी थी?।
कुशीनगर, 10 अप्रैल (आरएनएस)। जनपद के माध्यमिक शिक्षा विभाग में एक ऐसा सनसनीखेज मामला प्रकाश मे आया है, जिसने प्रशासनिक कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता को भी कटघरे में खडा कर दिया है। मामला पडरौना नगर के रामकोला रोड स्थित संचालित गोस्वामी तुलसी दास इंटर कॉलेज के निलंबित प्रधान लिपिक ज्ञान प्रकाश पाठक व विद्यालय के प्रधानाचार्य से जुडी हुई है। निलंबित प्रधान लिपिक ज्ञानप्रकाश पाठक ने विद्यालय के प्रधानाचार्य पर गंभीर आरोप लगाया है। अगर आरोप सच है तो यह पूरे सिस्टम के लिए गंभीर चेतावनी है।
निलंबित कर्मचारी ज्ञानप्रकाश पाठक के आरोप के मुताबिक कॉलेज के प्रधानाचार्य द्वारा भेजा गया पंजीकृत पत्र (ईयू 653892915 आईएन) जब 4 अप्रैल 2026 की शाम पोस्टमैन की मौजूदगी में खोला गया, तो उसमें किसी प्रकार का कोई दस्तावेज नहीं, बल्कि सिर्फ एक सादा कागज मिला। हैरानी की बात यह है कि इस तथ्य की पुष्टि खुद पोस्टमैन ने लिखित मे की है। अब सवाल यह है कि क्या यह महज इत्तेफाक है या लापरवाही या फिर एक सुनियोजित साजिश? । पंजीकृत डाक, जिसे कानूनी रूप से प्रमाणिक संचार माना जाता है। उसमें खालीपन आखिर किस मंशा की ओर इशारा करता है? क्या लिफाफे मे दस्तावेज जानबूझकर नहीं भेजे गए? क्या विद्यालय के प्रधानाचार्य द्वारा भविष्य में यह दिखाने की तैयारी थी कि “सूचना भेजी जा चुकी थी? या फिर यह पूरा मामला किसी को फंसाने की रणनीति का हिस्सा है?। मामले की संवेदनशीलता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि यह पत्र एक निलंबित कर्मचारी को भेजा गया है। ऐसे में यह सवाल और गहरा हो जाता है कि क्या प्रक्रिया का पालन सिर्फ कागजों में दिखाने के लिए किया जा रहा है? ज्ञान प्रकाश पाठक का कहना है कि मुझे झूठे और कुटरचित आरोपों में फंसाकर निलंबित किया गया और सबसे चिंताजनक बात यह कि जिला विद्यालय निरीक्षक ने भी बिना उनका पक्ष सुने ही इस निलंबन को हरी झंडी दे दी। पीडि़त ने स्पष्ट तौर पर मांग किया है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
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