लखनऊ 10 अप्रैल (आरएनएस)। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री नवदीप रिणवा ने शुक्रवार को लोकभवन स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की जानकारी दी। यह सूची विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 अभियान के अंतर्गत जारी की गई, जो 27 अक्टूबर 2025 से 10 अप्रैल 2026 तक कुल 166 दिनों तक चला।मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि इस व्यापक अभियान को सफल बनाने में प्रदेश के सभी 75 जनपदों के जिला निर्वाचन अधिकारियों, 403 निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों, 12,758 सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों, 18 हजार से अधिक बीएलओ सुपरवाइजरों तथा 1.77 लाख से अधिक बूथ लेवल अधिकारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके साथ ही मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के 5.82 लाख से अधिक बूथ लेवल एजेंटों तथा करोड़ों मतदाताओं का सहयोग भी प्राप्त हुआ। अभियान के प्रचार-प्रसार में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया की भी अहम भूमिका रही।अभियान के अंतर्गत 6 जनवरी 2026 को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में कुल 12 करोड़ 55 लाख 56 हजार 25 मतदाता दर्ज थे। अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के साथ यह संख्या बढ़कर 13 करोड़ 39 लाख 84 हजार 792 हो गई है। इस प्रकार मसौदा सूची से अंतिम सूची तक कुल 84 लाख 28 हजार 767 मतदाताओं की वृद्धि दर्ज की गई। इसमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 7 करोड़ 30 लाख 71 हजार 61, महिला मतदाताओं की संख्या 6 करोड़ 9 लाख 9 हजार 525 तथा तृतीय लिंग के 4206 मतदाता शामिल हैं। 18 से 19 आयु वर्ग के मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो अब 17 लाख 63 हजार 360 हो गई है। जेंडर रेशियो भी बढ़कर 834 हो गया है।जनपदवार आंकड़ों के अनुसार मतदाताओं की संख्या में सर्वाधिक वृद्धि प्रयागराज, लखनऊ, बरेली, गाजियाबाद और जौनपुर जिलों में दर्ज की गई। वहीं विधानसभा क्षेत्रों में साहिबाबाद, जौनपुर, लखनऊ पश्चिम, लोनी और फिरोजाबाद में सबसे अधिक वृद्धि देखने को मिली।पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान 1.04 करोड़ मतदाताओं का मिलान नहीं हो सका, जबकि 2.22 करोड़ मतदाताओं में तार्किक विसंगतियां पाई गईं। इन विसंगतियों के निस्तारण के लिए 14 जनवरी 2026 से नोटिस जारी किए गए और 27 मार्च 2026 तक सभी सुनवाई पूर्ण कर ली गईं। सुनवाई प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए 5,621 नोटिस सुनवाई केंद्र स्थापित किए गए थे, जहां मतदाताओं को आवश्यक सहायता प्रदान की गई।मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 के दौरान बिना नोटिस दिए किसी भी मतदाता का नाम सूची से विलोपित नहीं किया गया। पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता और नियमानुसार संचालित की गई। इस दौरान राज्य स्तर पर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ पांच महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें आयोग के दिशा-निर्देशों और प्रगति की जानकारी साझा की गई तथा सुझाव प्राप्त किए गए।मतदाताओं की सुविधा के लिए शिकायत निवारण प्रणाली को भी सुदृढ़ किया गया। नागरिक भारत निर्वाचन आयोग के पोर्टल तथा मोबाइल ऐप के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं और उसकी स्थिति ट्रैक कर सकते हैं। प्राप्त शिकायतों के निस्तारण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए उत्तर प्रदेश को देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है।इसके अतिरिक्त राज्य स्तर पर हेल्पलाइन नंबर 1800-180-1950 तथा जिला स्तर पर 1950 नंबर के माध्यम से संपर्क केंद्र संचालित किए गए। इस अवधि में राज्य संपर्क केंद्र पर लगभग 34 हजार कॉल्स तथा जिला संपर्क केंद्रों पर 85 हजार से अधिक कॉल्स प्राप्त हुईं, जिनका सफलतापूर्वक समाधान किया गया।मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के निर्णय से असंतुष्ट है, तो वह निर्धारित प्रावधानों के अंतर्गत जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष 15 दिनों के भीतर प्रथम अपील तथा आवश्यकता पडऩे पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष 30 दिनों के भीतर द्वितीय अपील प्रस्तुत कर सकता है।उन्होंने सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, राजनीतिक दलों और मतदाताओं के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस अभियान की सफलता लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
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