:-प्रशासनिक कार्यशैली पर खड़े हो रहे गंभीर सवाल, बुल्डोजर का भी नहीं दिख रहा कोई खौफ ।
कर्नलगंज (गोण्डा) 15 अप्रैल। करनैलगंज तहसील क्षेत्र के नकहाबसंत गांव में प्राथमिक विद्यालय और सड़क के नाम दर्ज सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा एक वर्ष बाद भी नहीं हट सका है। तहसीलदार द्वारा कब्जेदारों को बेदखल करने तथा क्षतिपूर्ति वसूलने के आदेश जारी किए जाने के बावजूद प्रशासनिक कार्रवाई अब तक अधर में लटकी हुई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कर्नलगंज तहसील के नकहाबसंत गांव में गाटा संख्या 133 की करीब साढ़े सात बीघा भूमि सड़क एवं प्राथमिक विद्यालय के नाम दर्ज है। राजस्व विभाग के लेखपाल और राजस्व निरीक्षक ने करीब दो वर्ष पूर्व जांच कर रिपोर्ट तहसील प्रशासन को सौंपी थी, जिसमें गांव के 11 लोगों द्वारा भूमि पर अवैध कब्जा किए जाने की पुष्टि की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार अनूप कुमार पांडेय, कालीचरण, कृष्णकुमार, ननकू, रामधीरज, रामप्रकाश, परशुराम, रामअवतार, ननके, भिखारी प्रसाद और परशुराम द्वारा सरकारी भूमि पर कब्जा किया गया है। रिपोर्ट के आधार पर तहसीलदार कर्नलगंज ने 3 अप्रैल 2025 को आदेश जारी करते हुए सभी कब्जेदारों को भूमि खाली करने के निर्देश दिए थे। साथ ही प्रत्येक व्यक्ति से 35 हजार 360 रुपये क्षतिपूर्ति राशि वसूलने का आदेश भी दिया गया था। लेकिन आदेश जारी होने के एक वर्ष बाद भी न तो सरकारी भूमि कब्जामुक्त हो सकी और न ही किसी प्रकार की वसूली की जा सकी है। इससे प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी जमीन पर कब्जा होने से स्कूल और सड़क दोनों के विस्तार कार्य प्रभावित हो रहे हैं। लेखपाल राजकुमार यादव ने बताया कि कब्जेदारों को तीन माह का समय दिया गया था, जो काफी पहले पूरा हो चुका है। मामले की सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। वहीं उपजिलाधिकारी नेहा मिश्रा ने बताया कि मामला संज्ञान में है और राजस्व निरीक्षक को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। अब सवाल यह उठ रहा है कि जहां कहीं प्रशासन बुलडोजर चलाकर अतिक्रमण हटाने का दावा करता है, वहीं इस मामले में एक वर्ष बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी।
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