—- कागजों में हेराफेरी कर मठ की भूमि कब्जाने का आरोप।
—- महंत ने उठाई पुरातत्व जांच की मांग, प्रशासन पर देरी का आरोप।
कुशीनगर, 16 अप्रैल (आरएनएस)। जनपद के तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत डुमरिया मठ में मठ की जमीन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। मठ के महंत रूद्रानंद गिरी ने आरोप लगाया है कि सुनियोजित साजिश के तहत मठ की भूमि को कागजों में हेरफेर कर कब्रिस्तान के रूप में दर्ज करा दिया गया और उसी आधार पर वहां अवैध रूप से कब्रिस्तान बना दिया गया है।
महंत रूद्रानंद गिरी ने इस मामले को गंभीर बताते हुए मंडलायुक्त गोरखपुर को प्रार्थना पत्र सौंपकर पुरातत्व विभाग से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह भूमि दशकों से मठ की संपत्ति रही है, लेकिन कुछ लोगों ने कब्जे की नीयत से दस्तावेजों में छेड़छाड़ की। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वह मुख्यमंत्री को भी पत्र भेज चुके हैं, ताकि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच हो सके। महंत का दावा है कि पूर्व महंत महादेवा नंद गिरी के अनुसार मठ की जमीन के भीतर भगवान शिव की मूर्ति भी दबे होने की संभावना है, जो इस स्थान के धार्मिक महत्व को दर्शाती है।
इनसेट– ढाई महीने से अधूरी जांच, उठे सवाल– महंत ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि मंडलायुक्त के निर्देश पर तमकुहीराज तहसीलदार द्वारा लगभग ढाई माह पूर्व जांच शुरू की गई थी, लेकिन अब तक जांच की स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। इससे न केवल मामले में अनिश्चितता बनी हुई है, बल्कि विरोधी पक्ष का मनोबल भी बढ़ रहा है। महंत रूद्रानंद गिरी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मठ की भूमि से अवैध कब्रिस्तान नहीं हटाया गया तो यह सनातन आस्था पर सीधा आघात होगा। उन्होंने प्रशासन से जल्द कार्रवाई करने की मांग करते हुए कहा कि पुरातत्व विभाग की जांच से सच्चाई सामने आ जाएगी, दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा।
इनसेट– जनप्रतिनिधियों से भी लगाई गुहार– इस पूरे प्रकरण में महंत ने तमकुहीराज क्षेत्र के भाजपा विधायक से लगायत जिले के सभी जनप्रतिनिधियों से भी हस्तक्षेप की अपील की है, ताकि मठ की भूमि को सुरक्षित रखा जा सके और धार्मिक परंपराओं की रक्षा हो सके। ऐसे मे कहना मुनासिब होगा कि मामले ने स्थानीय स्तर पर संवेदनशील रूप ले लिया है। ऐसे में प्रशासन की निष्पक्ष और त्वरित जांच ही विवाद को शांत करने का रास्ता तय करेगी।
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