नईदिल्ली ,17 अपै्रल (आरएनएस)। नईदिल्ली महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने लोकसभा में 3 विधेयक पेश किए हैं। इन पर आज दूसरे दिन चर्चा जारी है। इस दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि इन विधेयकों का किसी ने विरोध नहीं किया है। उन्होंने कहा, सबसे विधेयक का समर्थन किया है, लेकिन बारीकी से देखें तो इंडिया के सभी सदस्यों ने अगर, मगर, किंतु, परंतु का इस्तेमाल कर स्पष्ट रूप से विरोध किया है।
शाह ने कहा, परिसीमन से ही एससी और एसटी सीटों का आरक्षण भी साफ होगा। विपक्ष विधेयक का विरोध कर परिसीमन का नहीं, बल्कि एससी/एसटी आरक्षण का विरोध कर रहा है। सदन में 543 सदस्य हैं। किसी की सीट में वोटर्स की संख्या 49 लाख है किसी की 60,000। क्या इस सदन में जो विरोध करते हैं, मुझे समझा सकते हैं कि जिस सांसद के क्षेत्र में 49 लाख मतदाता हो वो कैसे जिम्मेदारी निभाएगा।
शाह ने कहा, ऐसी दिखाई दिया कि विरोध इसे लागू करने के तरीके पर है। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि ये विरोध लागू करने का नहीं, बल्कि केवल महिला आरक्षण का है। विधेयकों का पहला उद्देश्य है कि महिला सशक्तिकरण करने वाले इस सुधार को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए। दूसरा उद्देश्य है- एक व्यक्ति एक वोट और एक मूल्य के सिद्धांत की भावना का लागू किया जाए।
शाह ने आगे कहा, 1971 से अब तक सीटों की संख्या फ्रीज है। 127 सीटें ऐसी हैं, जहां 20 लाख से ज्यादा मतदाता हैं। जहां 48 लाख मतदाता हैं, वो सांसद कैसे इनते मतदाताओं की अपेक्षा पर खरा उतरेगा। तेलंगाना के मल्काजगिरी में 48 लाख वोटर हैं। गाजियाबाद में 28 लाख संख्या है। 21 सीटों पर 20 लाख से ज्यादा वोटर हैं। परिसीमन करने दोगे तो एक की जगह 2 सीटें आ जाएंगी।
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