जौनपुर ,18 अपै्रल (आरएनएस)। आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति सरकारी उपेक्षा का शिकार है। आयुष को बढ़ावा देने के दावों के बावजूद, जिले के कई आयुर्वेदिक अस्पताल चिकित्सकों और मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं।जिले के कुल 36 आयुर्वेदिक अस्पतालों में से छह में एक भी चिकित्सक तैनात नहीं है। इन अस्पतालों में ओपीडी का समय समाप्त होते ही ताले लग जाते हैं, जिससे शाम होते ही सन्नाटा छा जाता है।शाहगंज में 25 शैय्या वाला अस्पताल है, जबकि लखनपुर और मडिय़ाहूं में 15-15 शैय्या वाले अस्पताल संचालित हैं। इसके बावजूद, दोपहर तीन बजे के बाद इन अस्पतालों में कोई कर्मचारी या चिकित्सक मौजूद नहीं रहता। इसके अतिरिक्त, जिले के 36 में से 26 चार शैय्या वाले आयुर्वेदिक अस्पतालों में भी पीने के पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ के पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। बजट की कमी और प्रशासनिक शिथिलता के कारण गरीब मरीजों को उपचार के लिए झोलाछाप डॉक्टरों का सहारा लेना पड़ रहा है।जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. कमल कुमार ने बताया कि लखनपुर, शाहगंज और मडिय़ाहूं जैसे अस्पतालों में मरीजों को भर्ती करने का आदेश है, लेकिन संसाधनों की कमी है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि सिकरारा में 50 बेड का एक अस्पताल निर्माणाधीन है, जिसके पूरा होने पर मरीजों को भर्ती की सुविधा मिल सकेगी।
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