रांची 21 अप्रैल (आरएनएस)। बिहार प्रदेश कांग्रेस कार्यालय, पटना में प्रदेश अध्यक्ष श्री राजेश राम जी की उपस्थिति में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में माननीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह जी ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 (106वां संविधान संशोधन) को आनन-फानन में विशेष सत्र बुलाकर लाया गया, लेकिन इसका उद्देश्य महिलाओं को तत्काल अधिकार देना नहीं, बल्कि राजनीतिक समीकरण साधना प्रतीत होता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह संसदीय इतिहास में शायद पहली बार हो रहा है कि कोई अधिनियम अभी तक लागू और नोटिफाई नहीं हुआ, फिर भी उसमें संशोधन लाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में इस विधेयक को कांग्रेस सहित पूरे विपक्ष ने महिलाओं के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए समर्थन दिया था। कांग्रेस ने तब भी मांग की थी कि इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए और 543 सीटों में से 181 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएं, ताकि संसद में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पहले जनगणना, जातिगत जनगणना और परिसीमन जैसी शर्तें जोड़कर इस प्रक्रिया को टालने का काम किया और अब संशोधन के माध्यम से इन महत्वपूर्ण पहलुओं, विशेषकर ओबीसी प्रतिनिधित्व के सवाल से बचने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि परिसीमन के जरिए भविष्य की राजनीतिक स्थिति को प्रभावित करने की मंशा स्पष्ट दिखती है, जिससे यह पूरी प्रक्रिया महिलाओं के सशक्तिकरण के बजाय सत्ता में बने रहने की रणनीति बनती जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस हमेशा से महिला आरक्षण की प्रबल समर्थक रही है और इतिहास गवाह है कि राजीव गांधी जी के नेतृत्व में 73 वें और 74 वें संविधान संशोधनों के माध्यम से पंचायती राज और नगर निकायों में महिलाओं को 33त्न आरक्षण देकर उनकी भागीदारी सुनिश्चित की गई। उन्होंने कहा कि महिलाओं को बार-बार आश्वासन नहीं, बल्कि वास्तविक अधिकार और प्रतिनिधित्व चाहिए। महिलाओं को ढाल बनाकर सत्ता बचाने की राजनीति देश की महिलाएं स्वीकार नहीं करेंगी। कांग्रेस इस मुद्दे पर अडिग है और महिलाओं के सम्मान, अधिकार और भागीदारी की लड़ाई मजबूती से लड़ती रहेगी।
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